मुलायम के हाथों में लोकसभा चुनाव की जादुई छड़ी
नई दिल्ली। मुलायम सिंह यादव के पास वो जादुई छड़ी है, जिसे घुमाते ही लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। इस छड़ी से वो सरकार को गिरा सकते हैं, या फिर अगले एक साल तक जीवनदान भी दे सकते हैं। इस छड़ी से अगर कोई डर रहा है, तो वो हैं राहुल गांधी और राजनाथ सिंह। यही कारण है कि भाजपा में बैठकों का दौर और कांग्रेस में कार्यकर्ताओं से वार्ताएं तेज़ हो गई हैं।
ममता बनर्जी के यूपीए छोड़ने के बाद मुलायम सिंह यादव के हाथ में जब जादुई छड़ी आयी, तो यूपीए ने उनकी हर बात माननी शुरू कर दी। आलम यह है कि उत्तर प्रदेश का इस समय कोई काम नहीं रुक रहा है। मनरेगा के लिये फंड हो या फिर केंद्रीय योजनाओं का संचालन। यूपी में अखिलेश यादव की सरकार आने के बाद केंद्रीय योजनाएं तेजी से दौड़ पड़ी हैं।

इसी के समानांतर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव की तैयारी में युद्ध स्तर पर जुटे हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का पूर्वानुमान है कि जैसे ही मुलायम की सारी तैयारियां पूरी होंगी, वैसे ही वो केंद्र में यूपीए से समर्थन वापस ले लेंगे और सरकार गिरा देंगे। ऐसा होने पर खुद ब खुद चुनाव की नौबत आ जायेगी। यही कारण है कि मुलायम पूरे विश्वास के साथ यह बात कह रहे हैं कि चुनाव 2014 नहीं 2013 में होंगे।
इस मामले में मुलायम ज्यादा देर नहीं करेंगे, क्योंकि अगर उन्होंने देरी की, तो मायावती की तैयारियां पक्की हो जायेंगी। वहीं राहुल गांधी और राजनाथ जहां, परिस्थितियों को फिलहाल समझने में लगे हैं, उन्हें पूरा मौका मिल जायेगा। लिहाजा उम्मीद है 2013 के अंत में दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान के साथ ही लोकसभा के चुनाव भी हो जायेंगे।
मुलायम का साथ देगी भाजपा
चुनाव को 2013 में कराने के लिये मुलायम का साथ भारतीय जनता पार्टी देगी। वो भी जून-जुलाई के बाद, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव निबट चुके होंगे। अगर कर्नाटक में फिर से भाजपा की लहर चली, तो भाजपा चाहेगी कि वह लहर जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों से टकराये। यदि ऐसा हुआ तो पूरे देश में भाजपा का बुखार सिर चढ़कर बोलेगा।
उस समय भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के पास गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गोवा, तमिलनाडु और पंजाब के विकास गाथा सुनाने का पूरा मौका होगा। मध्य प्रदेश में पहले से ही भाजपा का डंका पीटा जा रहा है। ऐसे में दिसंबर 2013 भाजपा के लिये काफी शुभ हो सकता है। ऐसे में राजनाथ सिंह के लिये कर्नाटक में सबसे बड़ी चुनौती बीएस युदियुरप्पा और उनकी टीम है।












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