शादी के लिए हां, लेकिन गांव में एन्ट्री नहीं

Khap Panchayat softens on Love marriages
नयी दिल्ली। प्यार के आगे बड़े-बड़ों को झुकना पड़ा है। एक बार फिर यही साबित हुआ। देशभर में प्यार करने वालों की नजर में विलेन बनी खाप पंचायतें भी वक्त के साथ बदलने को तैयार हैं। शनिवार को हुई हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों की 80 खाप पंचायतों के प्रतिनिधियों की बैठक में सर्वसम्मति से ये फैसले हुआ कि यदि प्रेमी जोड़े एक गोत्र या एक ही गांव के हैं और शादी करना चाहते हैं तो उन्हें इसकी इजाजत दी जा सकती है बशर्ते ऐसे जोड़ों को गांव से थोड़ी दूरी बनानी होगी।

खाप पंचायतों के खिलाफ एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर अपना पक्ष रखने के लिए खाप पंचायतों के प्रतिनिधियों की यह बैठक हुई। चौधरी रामकरण सोलंकी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया कि प्रेमी जोड़ों की हत्या एक घटना होती है, कोई साजिश नहीं। इसमें भी केवल दो परिवारों की ही भूमिका रहती है। बैठक में सुप्रीम कोर्ट के वकील बलराज मलिक भी मौजूद थे उन्होंने खाप पंचायतों से भी बदलाव की अपील की।

हरियाणा लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन जनरल डी.पी. वत्स ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष खाप पंचायतों का गौरवपूर्ण इतिहास और समाज को जोड़ने के लिए उनके कार्यों का ब्योरा रखा जाएगा।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एनजीओ की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा था कि कोर्ट एक बार खाप पंचायतों की भी राय सुनना चाहती है। इसके लिए एनजीओ के कार्यकर्ताओं को ही जिम्मेदारी सौंपी थी कि वे खाप पंचायतों में जाएं और कोर्ट में अपनी राय रखने के लिए कहें। इससे पहले भी समगोत्री शादी और ऑनर किलिंग की बढ़ती घटनाओं को संज्ञान लेते हुए कोर्ट तल्ख टिप्पणी कर चुकी है।

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