हम किसी मजहब को नहीं पहचानते: राहुल गांधी

देश के वर्तमान हालात का जिक्र करते हुए उन्होने कहा कि व्यवस्था में परिवर्तन किये जाने की सख्त जरूरत है। लेकिन हमें यह स्थायी तौर पर धीरे-धीरे करने होंगे। उन्होने कार्यकर्ताओं को बताया कि हमें आम आदमी को समझने की जरूरत है।
उन्होने पार्टी के भविष्य को मद्देनजर रखते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य है कि हम 50, 60 राष्ट्रीय स्तर के नेता तैयार करें जो कि सिर्फ एक प्रदेश को नहीं बल्कि पूरे देश को चला सके। उन्होने कहा कि मैंने पिछले आठ वर्षों के अपने राजनीतिक जीवन में काफी कुछ सीखा है और आज से मैं चाहे वो सीनियर लीडर हो या जूनियर सभी को एक ही नजरिये से देखूंगा। पार्टी में सभी बराबर हैं। उन्होने कहा कि कल रात मेरी मां सोनिया गांधी जी मेरे कमरे में आयी और मेरे सामने रोई उन्होने कहा कि 'सत्ता' एक जहर की तरह हैं, मैं आज यहां कहता हूं कि कांग्रेस हर आम आदमी की पार्टी है, हम प्रत्येक व्यक्ति का समर्थन करते हैं।
उन्होने पार्टी कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि सत्ता पार्टी के कुछ लोगों तक सिमटकर रह जाती है लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। राहुल गांधी कांग्रेस के तीसरे उपाध्यक्ष हैं। उनके पहले अर्जुन सिंह और जीतेंद्र प्रसाद उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
जयपुर में चल रहे कांग्रेस चिंतन शिविर से पहले ही यह उम्मीद की जा रही थी कि राहुल गांधी अब पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी लेंगे। पार्टी के युवा कार्यकर्ता उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देख रहे हैं।












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