आरक्षण का संविधान समाज में रोष बढ़ाएगा: भाजपा

ऐसे क्या कारण रहे है जिससे संविधान प्रदत्त आरक्षण का पूरा लाभ अनुसूचित जाति एवं जनजाति को नही मिल पाया है। आरक्षण व्यवस्था जाति व्यवस्था तथा सामाजिक कुरीतियों के विरूद्ध सुरक्षा एवं अवसर प्रदान करने के लिए संविधान में स्वीकार किया गया है। सबको बराबर का अवसर, भागीदारी एवं राष्ट्रीय सम्पदा में समानता के सिद्धांत पर साझेदारी के अवसर उपलब्ध कराना ही आरक्षण की मूल भावना है। यह संविधान संशोधन सामाजिक समरसता को कमजोर करेगा एवं आने वाले समय में समाज में विद्वेष और रोष को बढ़ाएगा।
लोकसभा के सभी सम्मानित सदस्यों को इस आरक्षण से उपज रहे तनाव, प्रशासनिक दक्षता पर होने वाले आघात को विचार में रख कर ही मतदान करें ऐसा आग्रह है। राष्ट्रहित समाज हित व वंचितों तथा पिछड़े गए लोगों के हित का सम्यक ध्यान रख कर ही इस संविधान संशोधन पर लोकसभा में मतदान होना चाहिए। जल्दवाजी में और मात्र चुनावों की गणित से समाज को तोड़ने की कार्यवाही किसी भी दृष्टि से उचित नही है। श्री सिंह ने अपील किया कि लोकसभा में इस बिल पर पुनः विचार किया जाए क्योंकि इस संशोधन के वर्तमान स्वरूप के कारण राष्ट्रहित पर होने वाले दूरगामी परिणाम से बचा जा सके।












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