ये है मुलायम की माया, जनता भी खुश मैडम भी

अगर वोटों की बात करें तो यूपीए में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके पास 206 सांसद हैं। उसके बाद डीएमके के 18 सांसद एफडीए के साथ हैं। इनके अलावा एनसीपी के 9, राजद के 4, रलोद के 5, जेडीएस के 3 सांसद और 21 छोटे दलों एवं निर्दलीय सांसद यूपीए के साथ हैं। यानी कुल 266 वोट यूपीए के पास हैं, जबकि जरूरत 251 की है। इसका मतलब साफ है कि शाम को एफडीआई पर संसद की मुहर आसानी से लग जायेगी। अब मुलायम के 22 और मायावती के 21 सांसद वोट का अब कोई मायने नहीं रह गया है, क्योंकि सपा और बसपा के विधायकों ने वॉकआउट कर दिया है।
मुलायम और माया विरोधी होते हुए भी वोट देने के लिये क्यों नहीं रुके। मुलायम और माया दोनों ही वॉकआउट कर गये। अब जरूरी वोटों का 251 का आंकड़ा नीचे गिरकर 210 के करीब पहुंच जायेगा और ऐसी स्थिति में कांग्रेस के लिये एफडीआई को लोकसभा में पास कराना आसान हो जायेगा।
यानी सुबह से एफडीआई का विरोध कर रहे मुलायम सिहं जब संसद से बाहर निकलेंगे तो सोनिया गांधी को खुश देखेंगे। यही नहीं यूपी लौटने पर जनता के सामने भी यह कहने का माददा रखेंगे कि उन्होंने एफडीआई का खुला विरोध किया।
विरोध करने वाले सांसदों में भाजपा के 115, टीएमसी के 19, बीजद के 14, जदयू के 20, एआईएडीएमके के 13 और लेफ्ट व वाम दलों के 24 सांसद हैं। यानी कुल 218 वोट विरोध में पड़ेंगे। यानी विरोधी दल जरूरी आंकड़े से खासे दूर हैं। चूंकि अभी मुलायम सिंह यादव और मायावती को लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिये थोड़ा वक्त और चाहिये, इसलिये वो विरोध में वोट करके सरकार को संकट में कतई नहीं डालेंगे।












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