• search
उत्तर प्रदेश न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

फतेहपुर रेप पीड़िता को आजाद क्यों नहीं कर रही पुलिस?

By रामलाल जयन
|
<ul id="pagination-digg"><li class="previous"><a href="/news/2012/12/03/uttar-pradesh-no-action-in-fatehpur-rape-case-224550.html">« Previous</a>

Police
फतेहपुर। उत्तर प्रदेश में शायद यह पहला मामला है जहां रेप की शिकार बालिग छात्रा को फतेहपुर पुलिस 13 दिन से नारी निकेतन में बंद किए है। इस मामले में जहां नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी की जानी चाहिए, वहां एक तरह से नारी निकेतन जैसी जेल में उसे बेकसूर बंद रखा गया है। अब तक पीडि़ता की किसी परिजन या रिश्तेदार से मुलाकात भी नहीं होने दी गई है।

उल्लेखनीय है कि फतेहपुर शहर के लोधीगंज मुहल्ले की रहने वाली एक बालिग दलित छात्रा ने 24 नवम्बर को कोतवाली पुलिस में अजय व उसके अन्य सात सहयोगियों के खिलाफ मु. अ. संख्या-567/12, धारा-493, 313, 376, 504, 506 आईपीसी व 3(1)12 एससी-एसटी एक्ट के तहत अभियोग दर्ज कराया था। पुलिस अभियोग दर्ज करने से पहले उसे चार दिन तक महिला थाने में बंद किए रही, बाद में नारी निकेतन में भेज दिया है।

इस नारी निकेतन के नियम-कानून इतने तगड़े हैं कि पीड़िता के परिजन या रिश्तेदार अब तक मुलाकात नहीं कर सके। इस बीच पुलिस के सिपाही तो तो बेरोक-टोक मुलाकात कर उसे विवेचक के समक्ष सुलह का हल्फनामा दाखिल करने का दबाव बना रहे हैं, पर उसकी छोटी बहन कोमल उर्फ रेनू उसे कपड़े देने गई तो उसे यह कह कर वापस कर दिया गया कि सीओ साहब के लिखित आदेश के बिना नहीं मिल सकते।

उसकी छोटी बहन ने बताया, "वह अपनी बहन को पहनने के कपड़ै लेकर पहुंची थी तो नारी निकेतन की संचालिका पुष्पा मौर्या ने उसे वापस कर दिया है।" नारी निकेतन की संचालिका पुष्पा मौर्या बताती हैं, "पीड़िता की जान को खतरा है, इसलिए सीओ साहब मुलाकात में रोंक लगाए हुए हैं।" विवेचक सीओ गौरव सिंह ने रीडर अरविंद मिश्र ने बताया, "पीड़िता को जान का खतरा है, इसलिए उसे घटना स्थल का निरीक्षण होने और अदालत में सीआरपीसी की धारा-164 का बयान दर्ज होने तक उसे नारी निकेतन में रहना होगा।"

रीडर यह नहीं बता पाए कि 13 दिन से आईओ न तो अभियुक्तों की गिरफ्तारी कर सके और न ही अग्रिम प्रक्रिया में ही गति आई। अपर पुलिस अहधीक्षक पहले ही कह चुके हैं, "सीओ अपने स्तर से जांच में जुटे हैं, अपनी सुविधानुसार सभी कार्रवाई संपादित करेंगे।"

उधर, गुलाबी गैंग के राष्ट्रीय संयोजक जय प्रकाश शिवहरे का कहना है, "पुलिस मुल्जिमानों को राहत प्रदान करने और पीडि़ता को मानसिक रूप से बेहद कमजोर करने की नियत से उसे नारी निकेतन में बंद किए है।" यहां यह बताना जरूरी है कि देश की सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था के अनुसार कोई भी बालिग व्यक्ति अपनी स्वैच्छा से कहीं भी रहने को स्वतंत्र है, लेकिन फतेहपुर की पुलिस को न्यायालय के आदेश की भी परवाह नहीं है।

ह्यूमन राइट्स ला नेटवर्क से जुड़े अधिवक्ता शिवकुमार मिश्र का कहना है कि ‘पुलिस ने पहले महिला थाने और अब 13 दिन से नारी निकेतन में बंद कर पीडि़ता के मौलिक और मानवाधिकारों का हनन किया है, उनका संगठन इस मामले में उच्च न्यायालय में एक जनहित रिट दाखिल करने की तैयारी कर चुका है।" सबसे अहम सवाल यह है कि आखिरकार फतेहपुर पुलिस रेप पीडि़ता को नारी निकेतन से आजाद क्यों नहीं कर रही? इसके पीछे पुलिस की मंशा क्या है? कहीं ऐसा तो नहीं कि पीड़िता की रिहाई से पुलिस को अपने द्वारा किए गए गैर कानूनी कार्यों के उजागर होने का भय सता रहा हो।

<ul id="pagination-digg"><li class="previous"><a href="/news/2012/12/03/uttar-pradesh-no-action-in-fatehpur-rape-case-224550.html">« Previous</a>

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Uttar Pradesh police is still not taking any action in Fatehpur Rape case. Even polie is not releasing the victim from Nari Niketan.
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X