हरकतें बता रही कि अफजल की उल्टी गिनती शुरू
अंग्रेजी अखबार डेली मेल के मुताबिक राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अफजल की दया याचिका को रिव्यू के लिए गृह मंत्रालय के पास भेज दिया है। अब फैसला गृह मंत्रालय के ऊपर है कि अफजल के बारे में वो क्या निर्णय लेता है। सबको उम्मीद है कि होम मिनिस्टरी अफजल के फांसी वाले फैसले को ही सही ठहरायेगी।
सबसे बड़ा सवाल है कि कसाब जो कि अफजल के बहुत बाद भारत में आया और यहां आकर खूनी होली खेली थी उसको सरकार ने फांसी पर लटका दिया लेकिन पिछले 12 साल से भारत की जेल में रोटियां तोड़ रहे अफजल को वो क्यों मेहमान बनाये हुए हैं? इसके पीछे सरकार की मंशा क्या है? आखिर वो फैसले लेने में इतना देर क्यों लगा रही है?
विरोधी पार्टियों का कहना है कि सरकार अफजल गुरू के माध्यम से राजनीति चमकाने के चक्कर में हैं। बुधवार को जैसे ही कसाब की फांसी की सजा आयी गुजरात के सीएम नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह दोनों ने ट्विटर पर अफजल की फांसी की मांग की है। खैर देखते हैं कि अफजल का नंबर अब कब आता हैं उम्मीद करते हैं कि कसाब की तरह अफजल भी अब बहुत दिनों का मेहमान नहीं हैं।













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