राम की नगरी में ही नहीं हो पा रही रामलीला
अयोध्या में इस बार मात्र दो स्थानों पर रामलीला का आयोजन हो रहा है वह भी मुख्यमंदिर से काफी दूर, जबकि दुर्गा प्रतिमाएं करीब 168 स्थानों पर स्थापित की गयी है। अयोध्या फैजाबाद के क्षेत्र में करीब सात सौ स्थानों पर दुर्गा पूजा का आयोजन है जबकि रामलीलाओं का मंचन न के बराबर है।
रामलीलाओं के मंचन स्थलों पर आ रही कमीं के बारे में केन्द्रीय दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष मनोज जायसवाल का कहना है कि युवकों में दुर्गापूजा के प्रति आकर्षण बढ़ा है। हालात यह हैं कि कई बार रामलीला में कलाकार ही नहीं मिलते क्योंकि वह दुर्गापूजा में शामिल हो जाते हैं।
आमतौर पर रामलीला का एक दर्शन पर ही मंचन करना होता है जबकि दुर्गापूजा में मनोरंजन के साधन सम्बन्धित कमेटी को अपनी क्षमतानुसार बदलने का पूरा अवसर प्राप्त होता है। वहीं रामलीला के कम होते चलन की एक वजह यह भी है कि रामलीला के आयोजन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
अयोध्या के बाजारों में रामलीला में प्रयुक्त साजो सामान की काफी किल्लत हैं। लोग कहते हैं कि कहने को तो अयोध्या राम की नगरी है लेकिन प्रशासन के दबाव के चलते लोग राम का नाम तथा खुलेआम राम के जयकारे लगाने तक से संकोच करने लगे हैं। जबकि दुर्गापूजा में ऐसा कुछ भी नहीं है सबकुछ बाजार में उपलब्ध है।
दुर्गापूजा का पूजा प्रचलन बढऩे से पहले अयोध्या और उसके आस-पास के क्षेत्रों में रामलीलाओं की धूम मची रहती थी लेकिन अब बदलती परिस्थितियों में दुर्गापूजा के पण्डालों से आती तेज आवाज ने रामलीला के कलाकारों की आवाज को दबा दिया है।
दुर्गापूजा के दौरान पूरी अयोध्या व इसके आसपास के क्षेत्र दुर्गामय हो गये हैं। मां दुर्गा की कलात्मक झांकियां सजी हुई है। इस बार दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान चूडिय़ों की चमक, गुलाब फूल की सुगन्ध तथा मेवाजडि़त दुर्गा प्रतिमाओं के दर्शन हो रहे हैं।













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