कोर्ट परिसर में कुख्यात उधम सिंह पर फायरिंग

कोर्ट परिसर में हुई अंधाधुंध फायरिंग में दो वकील भी घायल हुए हैं।
एसएसपी गाजियाबाद प्रशात कुमार ने गुरुवार को जानकारी दी कि सुबह डासना जेल में निरुद्घ बंदी उधम सिंह को कोर्ट पेशी पर लाया गया था। पेशी के दौरान अचानक तीन असलहाधारी बदमाश उसके निकट पहुंच गए। सुरक्षाकर्मी कुछ समझ पाते इससे पहले ही उन्होंने उधम सिंह पर तबड़तोड़ गोलियां चला दी। कोर्ट परिसर में गोली चलने से अफरा-तफरी मच गयी।
फायरिंग के दौरान एक गोली उधम सिंह की कनपटी पर लगी और वह लहुलुहान होकर गिर पड़ा। हादसे के दौरान वहां खड़े दो वकील भी घायल हो गये। कोर्ट परिसर में गोली चलने की खबर मिलने पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने आनन-फानन में घायलों को इलाज के लिए अस्पतताल में भर्ती कराया, जहां उधम सिंह की मौत हो गयी। जबकि सही मायने में उधम सिंह की मौत नहीं हुई है। वह अस्पताल में भर्ती हैं।
एसएसपी प्रशांत कुमार का कहना था कि हमलावारों ने वकीलों के कपड़े पहन रखे थे ताकि कोई उनको पहचान न सके। घटना को अंजाम देने के बाद हत्यारे आसानी से वहां से भाग खड़े हुए। इस घटना के बाद नाराज वकीलों ने भी जमकर हंगामा किया। बताया जाता है कि उधम सिंह पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में दर्जनों अपराधिक मामले दर्ज हैं।
उधम सिंह ने अपने गैंग के साथ अपहरण, लूट और अन्य घटना को अंजाम दिया है। मरेठ पुलिस ने उधम सिंह को गिरफ्तार किया था। मेरठ जेल में उधम सिंह की पैठ को देखते हुए उसे गाजियाबाद की डासना जेल भेज दिया गया था। छानबीन में पुलिस को इस बात का पता चला है कि उधम सिंह की दूसरे अपराधिक गैंग से पुरानी रंजिश चल रही थी।
पुलिस रंजिश को ही हत्या का कारण मान रही है। गाजियाबाद कोर्ट खुद में काफी संवदेनशील है क्यों यह पर कई हाईप्रोफाइल बंदी की पेशी अक्सर होती है। चाहे वह निठारी काण्ड हो, एनएचआरएम घोटाले के आरोपी हो या फिर आरूषी हत्याकाण्ड की सुनवाई भी गाजियाबाद कोर्ट में ही होती है। उत्तर प्रदेश ने यह कोई पहली बार नहीं है जब कोर्ट परिसर में ऐसी घटना हुई है। चंद रोज पहले मऊ जनपद में कोर्ट के बाहर एक वकील अफजाल की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। पुलिस अभी तक अफजाल के हत्यारों का कोई सुराग नहीं लगा सकी है।












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