वाड्रा को जमीन देने के बदले मिला चुनावी टिकट

इनेलो प्रमुख ने कहा कि मेवात जिले के गांव शकरपुरी में यूपीए अध्यक्षा के दामाद राबर्ट वाड्रा की कंपनी द्वारा करीब 29 एकड़ जमीन जिसका कलेक्टर रेट करीब साढे चार करोड़ रुपए से ज्यादा था और बाजार भाव करीब 14 करोड़ था, मात्र 71 लाख रुपए में खरीदे जाने को पूरी तरह से अव्यवहारिक और एक बड़े घोटाले की ओर संकेत बताते हुए प्रदेश में राबर्ट वाड्रा द्वारा किए गए सभी नामी व बेनामी सौदों को उजागर किए जाने और इन सभी खरीद सौदों की जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी कार्यरत न्यायाधीश से करवाए जाने की मांग की है।
इनेलो प्रमुख ने कहा कि शकरपुरी गांव में मई 2009 के दौरान राबर्ट वाड्रा की कंपनी मैसर्ज रियल अर्थ अस्टेट प्रा.लि. द्वारा 11 मई को पांच अलग-अलग रजिस्ट्रियां फिरोजपुर झिरका की तहसील में करवाई गई और ये सभी रजिस्ट्रियां उस क्षेत्र के लिए प्रशासन द्वारा तय किए गए कलेक्टर रेट से बहुत कम दर पर दर्ज हुई हैं। उन्होंने कहा कि यह जमीन न सिर्फ एनसीआर क्षेत्र में पड़ती है बल्कि राजस्थान सीमा के भी करीब है। उन्होंने कहा कि ये सभी रजिस्ट्रियां रियल अर्थ अस्टेट प्रा.लि. के नाम बजरिया डायरेक्टर राबर्ट वाड्रा पंजीकृत हुई हैं। उन्होंने कहा कि आम तौर पर कलेक्टर रेट बाजार भाव से आधा या एक तिहाई होता है और इस क्षेत्र का कलेक्टर रेट 16 लाख रुपए प्रति एकड़ और बाजार भाव 40 से 50 लाख रुपए प्रति एकड़ के बीच उस समय था जब ये जमीन की खरीद दिखाई गई।
इनेलो प्रमुख ने कहा कि इनमें से एक रजिस्ट्री 11 एकड़ 5 मरला की हुई है जिस जमीन का कलेक्टर रेट पौने दो करोड़ रुपए से ज्यादा था और बाजार भाव करीब पांच करोड़ रुपए था। इस जमीन को मात्र 24 लाख रुपए में खरीदा दिखाया गया है जो कि औसत दो लाख 20 हजार रुपए प्रति एकड़ से भी कहीं कम बनता है। इसके अलावा एक अन्य रजिस्ट्री 9 एकड़ 4 कनाल 15 मरला के लिए हुई है। इस जमीन का भी कलेक्टर रेट 16 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से करीब डेढ करोड़ रुपए से ज्यादा बनता है और बाजार भाव करीब साढे चार करोड़ रुपए के आसपास बनता था।
यह जमीन मात्र 20 लाख रुपए में खरीदी दिखाई गई है जो कि औसत दो लाख 10 हजार रुपए के आसपास प्रति एकड़ बनती है। इसके अलावा एक अन्य जमीन के टुकड़े की रजिस्ट्री छह लाख रुपए में हुई है। इस जमीन का कलेक्टर रेट करीब 31 लाख रुपए बनता है और बाजार भाव करीब एक करोड़ रुपए के आसपास था जबकि रजिस्ट्री मात्र 6 लाख रुपए में हुई है। इसी तरह तीन अन्य रजिस्ट्रियां जिनमें से दो रजिस्ट्रियां दो-दो एकड़ की हैं और एक रजिस्ट्री दो एकड़ 17 मरले की है। इन्हें भी मात्र सात-सात लाख रुपए में खरीदा दिखाया गया है जबकि इनका कलेक्टर रेट 32 व 33 लाख रुपए और मार्केट रेट करीब एक करोड़ रुपए के आसपास था।
जमीन के बदले मिली टिकट
चौटाला ने कहा कि ये रजिस्ट्रियां नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद के पारिवारिक सदस्यों की ओर से राबर्ट वाड्रा की कंपनियों के नाम पर करवाई गई हैं और रजिस्ट्रियां करवाने वालों में आफताब अहमद की पत्नी मैमूना, उनकी माता फिरदोश बेगम और उनके दो भाइयों की पत्नियां रजिया एवं रूबी तबस्सुम भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरे हरियाणा अथवा एनसीआर क्षेत्र में कहीं भी कोई भी जमीन दो से ढाई लाख रुपए प्रति एकड़ औसत दर पर मिलना तो दूर ऐसा सोचना भी नामुमकिन है।
उन्होंने कहा कि इस जमीनी सौदे के बाद न सिर्फ आफताब को कांग्रेस टिकट मिला और वे विधायक बने बल्कि उन्हें करोड़ों रुपए का लाभ पहुंचाने के लिए उनकी पुश्तैनी जमीन को भी मास्टर प्लॉन के अंतर्गत विशेष लाभ दिया गया। उन्होंने कहा कि आखिर राबर्ट वाड्रा को ही हरियाणा में दो लाख रुपए प्रति एकड़ से ढाई लाख रुपए प्रति एकड़ के बीच जमीनें क्यों मिल रही हैं? उन्होंने कहा कि यह पूरा सौदा न सिर्फ संदेह के घेरे में है बल्कि इसकी उच्चस्तरीय जांच भी करवाए जाना बेहद जरूरी है ताकि यह बात सामने आ सके कि इस सौदे की आड़ में कितना काला धन इस्तेमाल हुआ है और सौदे के बदले किस-किस को क्या-क्या फायदा पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि यह घोटाला मीडिया में भी प्रमुखता से आज चुका है और सरकार द्वारा इस पर धारण की की गई चुप्पी से साफ है कि घोटाले में पूरी तरह से हुड्डा सरकार संलिप्त है।












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