अजित सिंह के करीबी बाबा हरदेव ने दिया इस्तीफा

पूर्व नौकरशाह बाबा हरदेव ङ्क्षसह के अचानक इस्तीफा देने से राजनीतिक हलकों में उनके इस्तीफे के कारणों की पड़ताल शुरू हो गयी है। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने पद छोड़ दिया।
इस बारे फिलहाल अभी कुछ स्पष्टï नहीं है लेकिन उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा है कि वह सैद्धांतिक मतभेदों के कारण त्यागपत्र दे रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा कि कि उनके साथ पार्टी से कुछ अन्य पदाधिकारी भी रालोद से नाता तोड़ सकते हैं।
बाबा हरदेव ने कहा कि हाल में घटी कुछ घटनायें उनकी खुद की नीतियों से मेल नहीं खाती इसीलिये उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अजित ङ्क्षसह से बात कर अवगत करा दिया है। उन्होंने कहा कि डीजल की कीमतों में वृद्धि और खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के वह पहले भी विरोधी रहे हैं और आज भी उसका विरोध करते हैं।
ऐसी हालत में वह पार्टी के अध्यक्ष पद पर नहीं रह सकते। बाबा हरदेव ङ्क्षसह ने कहा कि वह पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र नहीं दे रहे हैं। श्री ङ्क्षसह ने कहा कि केन्द्र की गलत नीतियों पर उसे समर्थन जारी रखने के सवाल पर वह अपने पद पर बने नहीं रह सकते थे। बाबा हरदेव सिंह ने पार्टी अध्यक्ष अजित सिह को भेजे त्यागपत्र में लिखा है कि वह सैद्धान्तिक कारणों से राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष पद के दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं।
श्री सिंह ने कहा कि त्यागपत्र देने वाले पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि विरोध उनका है लिहाजा वह इस्तीफा नहीं दें लेकिन पदाधिकारियों ने उनके आग्रह को नहीं माना। अभी कुछ और नेता इस सवाल पर त्यागपत्र देंगे। श्री सिंह के साथ रालोद के पांच पदाधिकारियों ने भी इस्तीफा दिया है। इस्तीफा देने वालों में आईटी एवं मीडिया प्रकोष्ठ अध्यक्ष विशाल ङ्क्षसह, प्रदेश महासचिव मध्य जोन विजय विक्रम सिंह, अध्यक्ष छात्र प्रकोष्ठ शशांक ङ्क्षसह, उपाध्यक्ष छात्र प्रकोष्ठ अनिल सिंह तथा अधिवक्ता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अंकुर सिंह शामिल हैं।












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