आम आदमी को समाप्त करना चाहते हैं मनमोहन: ममता

ममता ने फेसबुक पर लिखा, मैं पूछना चाहती हूं कि आम आदमी की क्या परिभाषा है? लोकतंत्र की क्या परिभाषा है? क्या ये सच नहीं है कि आम आदमी और सत्ता का उपयोग सरकार 'आम आदमी को समाप्त' करने के लिए कर रही है। क्या सरकार सोची समझी चाल के तहत ऐसा कर रही है? ममता ने शुक्रवार शाम प्रधानमंत्री के संबोधन के तुरंत बाद यह टिप्पणी की।
मनमोहन सिंह ने अपने संबोधन में आर्थिक सुधारों को जरूरी बताया था। मनमोहन सिंह ने देश के लोगों को 1991 के आर्थिक संकट को याद दिलाते हुए कहा था कि अगर हम आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हए, तो हालात 91 की तरह हो जाएंगे। उन्होंने संबोधन के दौरान डीजल की कीमतों में वृद्धि और खुदरा क्षेत्र में एफडीआई को जरूरी बताया था।
गौरतलब है कि शुक्रवार को एफडीआई और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी को लेकर तृणमूल कांग्रेस के 6 मंत्री यूपीए सरकार से अधिकारिक रूप से बाहर हो गए। सभी मंत्रियों ने इस्तीफा मनमोहन सिंह को सौंपा। अब सभी मंत्री राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को समर्थन वापसी की चिट्ठी सौपेंगे। मंत्रियों के इस्तीफे पर मनमोहन सिंह ने कहा था कि वह इस बात से दुखी हैं।












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