शायद इसलिये ममता को नहीं मना रही कांग्रेस!

शायद यही एक कारण है कि सरकार ममता बनर्जी को मनाने की जरुरत नहीं समझ रही। हालांकि इस बात की भी चर्चा है कि सोनिया गांधी खुद ममता को मनाने की कोशिश कर सकती हैं। लोकसभा की गणित पर चर्चा करें तो यूपीए के पास लोकसभा में 273 सीट है। अगर ममता की 19 सीटें हटा दी जायें तो यूपीए के पास 254 सीटें रह जायेगी। मगर तमाम विरोधों के बावजूद भी बसपा और राष्ट्रीय जनता दल यूपीए का समर्थन कर रही है। मतलब अगर गणितीय समीकरण देखें तो सीटों का आंकलन 279 तक होगा।
यूपीए- 273
तृणमूल- 19
बसपा- 21
राजद- 4
यूपीए 273 - तृणमूल 19 = 254
यूपीए + बसपा + राजद = 279
इसके अलावा यूपीए के साथ मुलायम सिंह की पार्टी सपा भी है जिसके पास लोकसभा में 22 सीटें हैं। मुलायम की सीटों को जोड़ लें तो यूपीए के आंकड़े 301 तक पहुंच जाते हैं जो कि बहुमत साबित करने के लिये काफी है। ऐसे में साफ लगता है कि इन गणितीय समीकरणों को यूपीए ने पहले से ही जोड़ रखा था इसलिये वो ममता को मनाने के मूड में नहीं है और बार-बार कह रही है कि वो अपने फैसले से पीछे नहीं हटने वाली है। वहीं दूसरी तरफ अगर मध्यावधी चुनाव भी होते है तो वो खुद को पूरी तरह से तैयार कर चुकी है।












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