संसद के मॉनसून सत्र में बह गये जनता के 10 करोड़ रुपए

75 per cent time and Rs. 10 crore wasted in Monsoon Session
नई दिल्‍ली। देश के सांसदों ने जनता के करोड़ों रुपए एक बार फिर पानी में बहा दिये। ये वो सांसद हैं, जिन्‍हें हम अपना कीमती वोट देकर चुनते हैं और संसद में भेजते हैं, ताकि देश की तरक्‍की हो सके, लेकिन जिस संसद में 88 फीसदी समय बर्बाद किया जाता हो।

सीधी बात करें तो आज समाप्‍त हो रहे मॉनसून सत्र में देश के सांसदों ने जनता के 10 करोड़ रुपए बर्बाद कर दिये। इस बार्बादी के बीच मात्र 4 बिल पास हो सके। यह अब तक का दूसरा सबसे खराब सत्र रहा है, जिसमें लोकसभा में मात्र 22 फीसदी समय चर्चा हुई, बाकी का समय हंगामे की भेंट चढ़ गया। वहीं राज्‍यसभा में निर्धारित समय के 29 फीसदी में चर्चा हुई। इससे पहले 2010 में शीतकालीन सत्र सबसे खराब रहा था, जब मात्र 3 प्रतिशत समय में चर्चा हुई थी।

एक महीने तक चले इस सत्र में मजेदार बात यह रही कि 4 में से तीन बिल तो मात्र 20 मिनट में पास हुए। इसके लिये सिर्फ केंद्र सरकार ही जिम्‍मेदार नहीं है, बल्कि विपक्षी दल भी जिम्‍मेदार हैं, क्‍योंकि हंगामा करते वक्‍त उनके सांसद यह नहीं सोचते कि सदन की कार्यवाही के एक-एक मिनट पर कितना धन खर्च होता है।

यही नहीं मौजूदा समय में कुल 100 विधेयक लंबित पड़े हैं, जिन पर चर्चा होनी अभी बाकी है। मॉनसून सत्र चला गया और अगले सत्र का इंतजार शुरू हो गया। यानी 100 विधेयकों की संख्‍या आगे चलकर और बढ़ेगी और पैसा ऐसे ही बर्बाद होता रहेगा।

कोयला घोटाले की भेंट चढ़े इस मॉनसून सत्र को मिलाकर पूरे साल की बात करें तो 2004 की तुलना में इस साल 2 बिल कम पास हुए हैं। 2004 में कुल 18 विधेयक पारित हुए थे, जबकि इस साल अभी तक कुल 16 विधेयक पारित हुए हैं।

अब यहां पर देश की जनता की ओर से एक सवाल लाजमी है- वो यह कि घोटाले कर-कर के पहले ही नेताओं ने जनता के मेहनत की कमाई को तिजोरियों में भर लिया है, अब उसके ऊपर से इस प्रकार पैसे की बर्बादी क्‍यों की जा रही है?

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