बंद फ्लैट में चार महीने तक सड़ती रही महिला की लाश

हैरानी भरा पहलू यह है कि इस बिल्डिंग के जिस फ्लैट में शव मिला है, उसके अगल-बगल फ्लैटों में कई लोग रहते हैं, लेकिन चार माह तक किसी को बदबू का अहसास तक नहीं हुआ। फिलहाल पुलिस ने इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई की है। शव की हालत को देखते हुए पोस्टमार्टम के लिए पीजीआइ रोहतक रेफर कर दिया।
महिला का भाई सुखदेव बृहस्पतिवार सुबह प्रीत की खबर लेने वहां आया था। कमरे पर ताला लगा देख उसे अनहोनी का शक हुआ और उसने पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने परिसर की पहली मंजिल पर बने 30 कमरों में से कमरा नं. 15 की रसोई से महिला का शव निकाला। शव पूरी तरह सूख चुका था और कपड़े बदन से चिपके हुए थे। महिला के भाई सुखदेव ने उसकी शिनाख्त की। अविवाहित प्रीत कौर के साथ उनकी मां भी रहती थी, लेकिन कुछ दिन पहले वह अपने बेटे सुखदेव के यहां चली गई थी। सुखदेव ने बताया कि वह बीच-बीच में प्रीत को संभालने आता रहता था।
सुखदेव ने कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया। मामले की जांच कर रही जेजे पुलिस चौकी की दर्शना देवी ने बताया कि परिजनों ने किसी तरह का शक-शुबहा नहीं जताया है। प्रीत कौर के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई, बल्कि उनकी मौत इत्तफाकिया है। परिजनों ने बताया कि प्रीत कौर की मानसिक हालत ठीक नहीं थी। ऐसा लगता है कि प्रीत कौर को चक्कर आ गया और गिर पड़ी। संभालने वाला कोई नहीं था, इसलिए उसकी मौत हो गई। बाहर से लॉक, चाबी अंदर लंबे समय थाईलैंड रहकर लौटीं प्रीत कौर की मौत बेशक इत्तफाकिया हो सकती है, लेकिन बहुत सारे सवालों के जवाब अभी अनुत्तरित हैं।
एक बड़ा पेच कमरा का बाहर से लॉक होना और चाबी का भीतर मिलना है। पुलिस कर्मचारी दर्शना का कहना है कि मृतका मानसिक बीमार थी, इसलिए अकसर बाहर से ताला लगाकर कूलर की खिड़की के रास्ते भीतर जाती थी। ऐसा ही प्रीत कौर के भाई सुखदेव भी मानते हैं। सवाल यह भी है कि किराये के लिए भवन मालिक ने कितनी बार दरवाजा नॉक किया? प्रीत कौर यहां डेढ़-दो साल से रह रही हैं। किराये के लिए इतना लंबा इंतजार समझ से परे है।












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