अखिलेश केन्द्र नहीं सुप्रीम कोर्ट की बात मानेंगे

जानकारों की मानें तो सपा पहले से ही पदोन्नति में आरक्षण दिए जाने के खिलाफ थी और अब केन्द्र सरकार का फैसला आने के बाद सपा का विरोध कांग्रेस पर भारी पड़ सकता है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है तथा राज्य सरकार इससे सहमत नहीं है। आरक्षण के मामले में यूपी सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्णय का ही पालन करेगी। पदोन्नति के मुद्दे पर आरक्षण समर्थक और विरोधी तो पहले से ही आमने सामने थे। गौरतलब है कि आरक्षण विरोधियों ने केन्द्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय के विरोध में कल काम बंद करने का निर्णय लिया है वहीं समर्थकों का कहना है कि वह चार घंटे अधिक काम करेंगे।
सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के अध्यक्ष शैलेन्द्र दूबे का कहना है कि पदोन्नति में आरक्षण के लिये संविधान संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दिये जाने के विरोध में कल प्रदेश में करीब 18 लाख कर्मचारी व अधिकारी कार्य नहीं करेंगे तथा राजधानी लखनऊ सहित जिला मुख्यालयों पर विरोध सभायें व प्रदर्शन किये जायेंगे। समिति ने राजनीतिक दलों खासकर कांग्रेस व भाजपा को चेतावनी दी है कि पदोन्नति में आरक्षण के मामले में संविधान संशोधन विधेयक लाया गया तो सामान्य व अन्य पिछड़े वर्ग के 80 प्रतिशत कर्मचारी वोट की राजनीति का वोट से ही करारा जवाब देंगे।
हालांकि श्री दुबे ने यह जरूर कहा कि आपात सेवाएं बहाल रहेंगी ताकि जनता को कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि पहले भी उच्चतम न्यायालय के फैसलों को पलटने के लिये चार बार संविधान संशोधन किया जा चुका है। पांचवी बार संविधान संशोधन का फैसला अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। संविधान के बिन्दुओं की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान पीठ ने अपने फैसले में पदोन्नति में आरक्षण को अंसवैधानिक नहीं ठहराया था बल्कि यह व्यवस्था दी थी कि अनुसूचित जाति/जनजाति के कार्मिकों को पदोन्नति में आरक्षण देने के पूर्व संख्यात्मक आंकडे से यह प्रमाणित कर लिया जाये कि जिनको पदोन्नति दी जा रही है वे अभी भी पिछड़े हैं या नहीं।
दूसरी ओर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने केन्द्रीय कैबिनेट के निर्णय पर खुशी जाहिर करते हुए संशोधन विधेयक को जल्द लोकसभा में पेश करने की मांग की। समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आरक्षण विरोधियों को संविधान का ज्ञान नहीं है। उन्होंने कहा कि आरक्षण विरोधी यदि हडताल या काम बंद करेंगे तो करीब सात लाख समर्थक कर्मचारी पूरी व्यवस्था संभालेंगे।












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