कसाब को फांसी देकर मम्‍मू जल्‍लाद की इच्‍छा पूरी करेगा बेटा

Pawan Jallad will fulfill father's dream by hanging Ajmal Kasab
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। मुंबई हमले का आरोपी और जिंदा गिरफ्तार किया गया एक मा‍त्र पाकिस्‍तानी आतंकवादी अजमल कसाब की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट के मुहर लगाने के बाद पवन जल्‍लाद को लग रहा है कि अब उसका सपना पूरा हो सकता है। बता दें कि पवन जल्‍लाद मम्‍मू जल्‍लाद का बेटा है। मम्‍मू जल्‍लाद की यह ख्‍वाहिश थी कि वो अपने हाथों से कसाब को फांसी पर लटकायें मगर वह यह ख्‍वाहिश पूरा किये बगैर ही दुनिया से चल बसे। वहीं मम्‍मू जल्‍लाद का पूरा परिवार भी यही चाहता है कि उसकी आखिरी ख्‍वाहिश को उसका बेटा पवन जल्‍लाद ही पूरा करे।

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कसाब के मौत की सजा पर मुहर लगाने के बाद से पवन जल्‍लाद बेहद खुश है। पवन का कहना है कि उसके पिता मम्‍मू जल्‍लाद चाहते थे कि वो अपने हाथों से कसाब को फांसी दें मगर अब वो इस दुनिया में नहीं हैं। पवन का कहना है कि पिता के जाने के बाद से पूरा परिवार चाहता है कि कसाब को मै अपने हाथों से फांसी देकर अपने पिता का अधुरा सपना पूरा करुं। पवन का कहना है कि उसके पिता एक जल्‍लाद होने के साथ ही साथ एक सच्‍चे देश भक्‍त भी थे। पवन ने बताया कि 26/11 हमले के बाद से मम्‍मू को आतंकवादी नाम से नफरत हो गई थी इसलिये वो कसाब को फांसी पर लटकाना चाहते थे।

अब पवन एक अकेला जल्‍लाद है इसलिये ऐसी उम्‍मीद जताई जा रही है कि सरकार उसे ही कसाब को फांसी पर लटकाने के लिये बुलायेगी। अगर ऐसा हुआ तो उसके पिता और परिवार की इच्छा पूरी हो जाएगी। पवन का कहना है कि उसके परिवार में जल्‍लाद का काम चार पीढि़यों से चला आ रहा है। पवन ने बताया कि अंग्रेजों के जमाने में मम्‍मू के परदाद ननवा जल्‍लाद फांसी लगाने का काम करते थे। उनके बाद वजीर चंद ने इस काम को जारी रखा। वजीर चंद की मौत के बाद उनके बेटे कल्लू को यह काम विरासत में मिला। कल्लू की आंखे बंद होने के बाद पवन के पिता मम्मू ने यह काम संभाल लिया।

आपको बताते चलें कि मम्‍मू जल्‍लाद ने सबसे पहले फांसी 1973 में लागाई थी। उसने आखिरी बार 1997 में जबलपुर के कामता प्रसाद तिवारी को फांसी पर चढ़ाया था। उसके बाद कसाब को फांसी पर चढ़ाने का उसका सपना पूरा होता इससे पहले ही बीमारी के कारण गत वर्ष उसकी मौत हो गई। पवन कहता है कि अभी तक वह अपने पिता व दादा के साथ फांसी देने जाया करता था। अगर बुलावा आया तो वह पहली बार अकेले ही इस काम को अंजाम देने जाएगा। वह इसके लिए मानिसक रूप से पूरी तरह तैयार है।

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