महज दो जोड़ी कपड़ों के लिये कसाब बन गया कुख्यात आंतकी कसाब

इस गरीबी के बीच दुनिया घुमने, ढ़ेर सारा पैसा कमाने और ऐशो आराम की जिंदगी बसर करने का सफर संजोने वाले अजमल ने ईद पर अपने पिता से दो जोड़ी नये कपड़े मांगे थे। गरीबी इस कदर थी कि कसाब के पिता उसकी यह मांग पूरी नहीं कर सके। बस क्या था अपनी मांगों को पूरा करने के लिये कसाब ने एक नया रास्ता अख्तियार कर लिया। पाकिस्तान के 25 वर्षीय इस युवक ने 2005 में गरीबी के साथ ही साथ अपना घर भी छोड़ दिया। छोटी-मोटी चोरी चकारी कर अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले भारत के इस गुनाहगार ने आतंकीवादी संगठन लश्कर ए तैयबा के राजनीतिक इकाई जमात उद दावा में शामिल हो गया।
अजमल से कसाब तक का सफर तय करने वाले इस आतंकवादी ने इसके बाद लश्कर ए तैयबा से भारत के खिलाफ नफरत और दहशतगर्दी का वह प्रशिक्षण हासिल किया जिसने 26 नवंबर 2008 को 166 मासूम लोगों की जिंदगी को लील लिया और दुनियाभर में दहशत और आतंकवाद की एक खौफनाक कहानी लिख दी। भारत को नासूर देने वाले इस दहशतगर्द को मुंबई हमलों से करीब छह महीने पहले अपने गांव में देखा गया था। कसाब के अलावा इस हमले को अंजाम देने में कई और पाकिस्तानी युवक शामिल थे जिन्हें कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से तैयार किया गया था।
कई वर्षों की जबर्दस्त ट्रेनिंग, सोची समझी रणनीति और मजबूत तैयारी के साथ कसाब और नौ अन्य पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मुंबई के अहम स्थानों जैसे होटल ताज महल, नरिमन प्वॉइंट, ओबराय ट्राइडेंट होटल और व्यस्तम सीएसटी स्टेशन पर अंधाधुंध गोलीबारी में सैंकड़ों लोगों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार कसाब को सैंकड़ों लोगों की जान लेने और इस अभियान को अंजाम देने के लिए उसके परिवार को डेढ़ लाख रुपये की रकम दिए जाने का वादा किया गया था। हमलों के दौरान सीसीटीवी फुटेज में एक बंदूक से अंधाधुंध गोलीबारी करते हुए साफ तौर पर दिख रहे इस पाकिस्तानी आतंकवादी को भले ही इसके आकाओं ने शहीद होने की ट्रेनिंग दी हो लेकिन मौत को लेकर इसके डर ने इसे आज भी जिंदा रखा है।












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