कश्मीर में अब तक तोड़े गये 170 मंदिर

अन्य धर्मों के धार्मिक स्थल मामूली सी खरोंच लग जाएं तो पूरा देश चिंतित हो जाता है। चैनलों और अखबारों में लंबे -लंबे लेख शुरू हो जाते हैं, लेकिन कश्मीर में 170 मंदिर ध्वस्त कर दिए गए। कहीं चूं सी आवाज नहीं आ रही है। जैसे लग रहा है यह तो सामान्य बात है। गृह राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह ने ज्ञानप्रकाश पिलानिया के सवाल के लिखित जवाब में जम्मू कश्मीर सरकार के आंकड़ों के हवाले से राज्यसभा को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के अब केवल 808 परिवार रह रहे हैं। 59442 पंजीकृत प्रवासी परिवार घाटी के बाहर रह रहे हैं। वास्तविक संख्या कहीं ज्यादा है। उन्होंने बताया कि कश्मीरी पंड़ितों के घाटी से पलायन से पहले वहां उनके 430 मंदिर थे। अब इनमें से मात्र 260 सुरक्षित बचे हैं। मंत्री ने स्वीकार किया 170 मंदिर क्षतिग्रस्त हो गये है। हालांकि सरकार का दावा है कि नब्बे मंदिरों की मरम्मत करायी गयी है।
उन्होंने कहा कि कश्मीरी प्रवासियों की समस्याओं को कम करने के लिए जम्मू एवं दिल्ली में प्रति व्यक्ति को हर माह 1250 रूपये मुहैया कराये जा रहे हैं। लेकिन हर माह इसके लिए प्रति परिवार पांच हजार रूपये की सीमा तय की गयी है। यह मदद एक जुलाई 2007 से प्रभावी है। हालांक एक तरफ कट्टरपंथियों ने हिंदू मंदिरों को तोड़ रहे हैं, दूसरी ओर कुछ लोग मंदिरों को बचाने में जुटे हैं। रैनावाड़ी में 400 साल पुराने वैताल भैरव मंदिर के जीर्णोद्धार का काम इन दिनो चल रहा है। इस परियोजना के लिए मुहिम चलाने वाले रैनावाड़ी एक्शन फोरम के एक सदस्य ने कहा कि मंदिर की दीवारें मरम्मत की जाएंगी । पिछले 22 साल तक यह मंदिर वीरान रहा है। इस मंदिर को बनवाने में स्थानीय मुसलमान भी आगे आए हैं।
जो कश्मीर पंडित वहां रह गए हैं या सरकारी नौकरी में है, उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। पनुन कश्मीर ने कहा कि कश्मीर में आज भी पंडितों के लिए वर्ष 1990 जैसे हालात हैं। डॉ. अजय चरंगू के मुताबिक कश्मीर में नौकरी कर रहे पंडितों को मुस्लिम कट्टरपंथियों से धमकियां मिल रही हैं। वे कह रहे हैं कश्मीर छोड़ो नहीं तो कत्ल कर देंगे।












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