यमुना उफान पर, एनसीआर में बाढ़ का खतरा बढ़ा

पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में बाढ़ की स्थिति विकराल होती जा रही है तथा लोग सुरक्षित स्थान की ओर जा रहे हैं। हजारों बीघा जमीन पानी में डूब गयी है। बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों ने तटबंधों को अपना अस्थायी आवास बना लिया है। वहीं नारायणी नदी के ऊफान से अब महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली कुशीनगर में भी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।
जिले की सीमा से गुजरने वाली नारायणी नदी पर बने एपी बांध के किनारे दो दर्जन से ज्यादा गांव बसे हैं। बांध का बड़ा हिस्सा पानी में विलीन हो गया है। बाढ़ की स्थिति से पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। उधर वाराणसी में गंगा आरती पर भी बढ़ते जलस्तर पर प्रभाव पड़ रहा है। आरती अब गंगा घाट की सीढिय़ों पर हो रही है। यहां घाटों के डूबने तथा महाश्मशान मणिकॢणका तथा ऐतिहासिक हरिश्चन्द्र घाट पर कोई खाली स्थान नहीं होने के कारण शव जलाने में भी परेशानी हो रही है जिस कारण सीढिय़ों पर शव जलाये जा रहे हैं।
गंगा का जलस्तर बढऩे से सहायक नदी वरूणा में भी पानी बढ़ गया है और निचले इलाके डूब गये हैं। उस इलाके में रहने वालों को सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा है। गंगा के तेज बहाव के कारण नौका संचालन पर रोक लगा दी गयी है। घाट पर बने दुकानों में पानी भर जाने से छोटे दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खडी हो गयी है। गंगा व यमुना के साथ गोमती का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। वहीं बहराइच जिले में घाघरा नदी के मुहाने पर बसे गांवों में बाढ़ की विभीषिका विकराल रप ले रही है और कई गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। एल्गिन ब्रिज पर घाघरा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।












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