बीएमडब्‍ल्‍यू केस में संजीव नंदा की सजा बरकरार

BMW case: SC upheld the conviction of Sanjeev Nanda case
नई दिल्‍ली। उच्चतम न्यायालय ने 1999 के बीएमडब्ल्यू हिट एण्ड रन मामले में संजीव नंदा की दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा। बहरहाल, न्यायालय ने उसे आईपीसी के कठोर प्रावधान 304 भाग दो (गैर इरादतन हत्या जिसमें मौत की सजा नहीं दी जाती) के तहत दोषी ठहराया जिसमें अधिकतम दस साल की सजा होती है। संजीव दस जनवरी 1999 को छह लोगों को अपनी कार से कुचलने के बाद फरार हो गया था।

इसके लिए नंदा की अलोचना करते हुए पीठ ने कहा कि उसका आचरण घोर निंदनीय है। न्यायालय ने नंदा को सुनायी गयी दो साल जेल की सजा बरकरार रखते हुए उसे दो साल तक सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया। साथ ही उसे पीठ ने कहा कि वह केंद्र को 50 लाख रूपये का भुगतान करे। यह राशि उन सड़क हादसों के पीडि़तों को बतौर मुआवजा दी जाएगी जिन हादसों में चालकों का पता नहीं चल सका हो।

उच्चतम न्यायालय ने यह व्यवस्था दिल्ली पुलिस की उस अपील पर दी जिसमें नंदा को सुनवाई अदालत द्वारा सुनाई गई पांच साल की सजा घटा कर दो साल करने के उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी। न्यायाधीशों ने अपने फैसले अलग अलग लिखे। न्यायमूर्ति राधाकृष्णन ने 13 साल पुरानी घटना में नंदा के आचरण को लेकर अधिक कठोर रूख रखा।

उन्होंने कहा कि नंदा गाड़ी चला रहा था और छह लोगों को कुचलने के बाद उसने गाड़ी नहीं रोकी। उन्होंने कहा कि नंदा घायलों को मरने के लिए छोड़ कर भाग गया था। पीडि़तों को लिए कुछ दया तो दिखाई जा सकती थी। न्यायालय ने नंदा को 50 लाख रूपया अदा करने का आदेश दिया जिसका इस्तेमाल सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को मुआवजा देने के लिये किया जायेगा।

न्यायमूर्ति राधाकृष्णन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके खिलाफ मामले का फैसला करते समय पीडि़तों के परिवारों को नंदा द्वारा दिया गया मुआवजा और उसकी 21 साल की उम्र उसकी सजा को कम नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता के उदारता वाले प्रावधान के तहत नंदा को दोषी ठहरा कर गलत किया है और इससे जनता में गलत संदेश जाएगा। न्यायालय ने एक अगस्त को इस मामले में तीन अन्य व्यक्तियों को बरी कर दिया था।

इन लोगों को सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के जुर्म में अलग अलग अवधि की सजाएं सुनाई गई थीं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जुलाई 2009 को यह कहते हुए नंदा की सजा पांच साल से घटा कर दो साल कर दी थी कि उसे खुद भी यह पता नहीं रहा होगा कि लापरवाहीपूर्वक और तेज गति से गाड़ी चलाने के कारण हादसा हो सकता है।

उच्च न्यायालय ने सबूत नष्ट करने के दोषी ठहराए गए तीन अन्य सह आरोपी उद्योगपति राजीव गुप्ता और उनके दो कर्मचारियों भोलानाथ तथा श्याम सिंह को सुनाई गई सजा की अवधि भी आधी कर दी थी। निचली अदालत ने गुप्ता को एक साल की सजा सुनाई थी जिसे उच्च न्यायालय ने घटा कर छह माह कर दिया। भोलानाथ और श्याम सिंह को छह-छह माह की सजा सुनाई गई थी जिसे उच्च न्यायालय ने तीन तीन माह कर दिया था।

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