7 साल फ्लैट में बंद रहीं बहनों का ताज़ा हाल

पैर और हाथों की जकड़न में भी सुधार आया है। नीरजा की हालत में पहले से ही सुधार है, लेकिन मां निर्मला दोनों को एक साथ अस्पताल से घर ले जाना चाहती है। पति से अलग होने से आहत ममता ने खुद को घर में ही कैद कर लिया था। छोटी बहन नीरजा ने भी ममता का दुख देखकर घर से निकलना बंद कर दिया था। सात वर्ष तक दोनों घर में बंद रहीं। अवसाद से उबर कर रोहिणी की दोनों बहनें नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रही हैं।
बड़ी ममता का वजन भी 12 किलो बढ़ गया है। छोटी बहन नीरजा को अब भी ममता की चिंता है। वह उसे अकेले नहीं छोड़ना चाहती। बाबा भीमराव अंबेडकर अस्पताल में इलाज के दौरान बहनों की सेहत में खासा सुधार हुआ। चार डॉक्टरों की टीम बहनों का इलाज करती रही है। भर्ती करते समय ममता का वजन 18 किलो था, जबकि अब 40 किलो तक पहुंच गया है। ममता छोटी बहन नीरजा से बात करती है और दोनों बहने अस्पताल की नर्स और वार्ड ब्वाय से सामान्य तरीके से बात करती हैं।
इलाज कर रहे डॉक्टरों ने एक महीने पहले कह दिया था कि नीरजा को हालांकि अस्पताल की जरूरत नहीं है, लेकिन नीरजा को वह अकेले नहीं छोड़ना चाहती, इसलिए दोनों को इसी सप्ताह एक साथ छुट्टी दी जाएगी। जून महीने रोहिणी के सेक्टर-आठ से दोनों बहनों को एक कमरे से मुक्त कराया गया था। उन्होंने खुद का बीते कई साल से कमरे में बंद कर रखा था।
ममता करीब तेरह साल से अपने पति से अलग मायके में ही रह रही थी। घऱ से बाहर किसी भी काम के लिए इनकी मां या फिर बेटा ही बाहर जाया करता था। ये दोनों बहनें इतनीं बीमार और कमजोर हो चुकी थीं कि इन्हें देख कर किसी कि भी रूह कांप जाए। ये दोनों बहनें मानसिक और शारीरिक रूप से इतनी बीमार थी कि उनका शरीर लगभग गल चुका था। इनके रिश्तेदार ही कभी कभार पैसे दे जाते थे जिससे घर का खर्च चल रहा था। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों बहनों को बेहद खराब हालत में यहां से निकालकर रोहिणी के अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया था। दोनों बहनें इतनी कमज़ोर हो गईं थी उनकी सहायता के लिए पहुंचे कैट्स के कर्मचारी भी उन्हें उठाने से डर रहे थे कि कहीं इससे उनकी हड्डियां ना टूट जाएं।












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