कब्रिस्तान पर बसी है लखनऊ की पॉश कालोनी

लखनऊ विकास प्राधिकरण की करतूत थी कि वर्ष 1983 में गोमती नगर को बसा दिया। गोमती नगर प्रदेश की उन कालोनियों में से एक है जहां जमीन के दाम आसमान को छूते हैं। वर्तमान समय में गोमती नगर में जमीन लेना आम आदमी के लिए सपना देखने जैसा है। जमीन के जानकारों के अनुसार इस पॉश कालोनी में आज मीन के दाम 6000 रुपए वर्ग फीट तक हैं जो कभी बीस से पचास रुपए वर्ग फीट हुआ करते थे और लेने वाला कोई नहीं था। फिर भी लोगों ने धीरे-धीरे जमीने ले ही लीं।
विशाल खण्ड के एक मकान में किराए पर रहने वाले राकेश बताते हैं कि उनकी पत्नी ने कई बार घर में किसी महिला के साये को देखा जो उसे सोनी नहीं देती थी। राकेश की पत्नी ने दो बार गर्भधारण किया लेकिन बच्चा गर्भ में ही मर गया। एक तांत्रिक ने उन्हें बताया कि घर के नीचे एक महिला व उसके बच्चे की कब्र थी जिस कारण उसकी पत्नी यहां मां नहीं बन सकती। राकेश ने घर छोड़ा और आज वह एक पुत्र के पिता हैं।
यह दासतां सिर्फ राकेश की नहीं बल्कि दर्जनों की संख्या में ऐसे लोग हैं जहां मकानों के नीचे बनी कब्रों में रहने वाले साए से सताए हुए हैं। कालोनी के इतिहास पर नजर डालें। इलाके में पहले गंज शहीदा नाम का कब्रिस्तान हुआ करता था। जहां आज विशाल खण्ड-1 बसा हुआ है वहां से शमशान आरम्भ होता था और काफी दूर तक जाता था जहां लोग मुर्दों को दफनाया करते थे। हालांकि अभी भी यहां एक कब्रिस्तान है जहां लोग मुर्दों को दफनाते हैं लेकिन अब इसका क्षेत्रफल काफी छोटा हो गया है और चहार दीवारी बना दी गयी है।
शहर के पुराने बाशिंदों से बात करें तो पता चलता है कि प्राधिकरण ने किस प्रकार लोगों के साथ धोखा किया। प्राधिकरण ने कब्रिस्तान पर मिट्टी डालकर पटवा दी जिसके बाद वहां पर प्लाटिंग कर जमीन बेचना शुरू कर दिया। आज गोमती नगर का क्षेत्रफल इतना बढ़ गया है कि प्राधिकरण को वहां 40 खण्ड बनाने पड़े।












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