जब ममता बात करने को तैयार होंगी तब बात करुंगा: प्रणव

मुखर्जी ने कहा कि 19 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनकी उम्मीदवारी की घोषणा होने के बाद से ही वह आशा कर रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस उनका समर्थन करेगी। उन्होंने कहा, मैं समझता हूं कि उन्होंने अभी कोई निर्णय नहीं किया है। मैं आशा करता हूं कि जब वे निर्णय करेंगे वे मेरा समर्थन करेंगे। मुखर्जी ने यह बात यहां पर माकपा, अखिल भारतीय फारवर्ड ब्लाक के विधायकों और सांसदों के साथ ही कांग्रेस के विधायकों और सांसदों से मुलाकात करने के बाद कही जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें समर्थन देने की बात कही।
मुखर्जी ने इस मुद्दे पर और किसी प्रश्न का उत्तर देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि मैं और कुछ नहीं कहूंगा। इस बीच तृणमूल कांग्रेस नेता एवं राज्य के पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि प्रणव को ममता को फोन करके यह जानने का प्रयास करना चाहिए कि वह उनसे बात करेंगी या नहीं। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, प्रणव मुखर्जी को यह जानना चाहिए कि ममता बनर्जी उनके बात करेंगी या नहीं और यह पता लगाने के लिए उन्हें ममता को फोन करना चाहिए तथा इसमें किसी मध्यस्थ की आवश्यकता नहीं है।
मुखर्जी की माकपा और फारवर्ड ब्लॉक के सांसदों तथा विधायकों से मुलाकात के बारे में सुब्रत ने कहा कुछ लोगों को माकपा का साथ अच्छा लगता है। तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल में उसकी गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के बीच संबंधों में उस वक्त और खटास आ गई जब सुब्रत ने कहा कि अगर कांग्रेस चाहे तो गठबंधन से अलग हो सकती है। कांग्रेस के दो सांसदों ने आलाकमान से गठबंधन तोड़ देने का अनुरोध किया है। इससे पहले, मुखर्जी से मुलाकात के बाद कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी और दीपा दासमुंशी ने तृणमूल पर सोनिया गांधी और प्रणव मुखर्जी के खिलााफ दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया और गठबंधन तोड़ देने की मांग की।












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