आठ साल बढ़ा लोकायुक्त का कार्यकाल

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधानसभा में कार्यकाल बढ़ाये जाने का यह विधेयक पारितकर दिया था अभी तक यह राज्यपाल के विचाराधीन लंबित था।आधिकारिक सूत्रों ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया किराज्यपाल ने बजट सत्र के दौरान विधानसभा में पारित हो चुके लोकायुक्त एवं उपलोकायुक्त 'संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है।
इस विधेयक को राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद अब लोकायुक्त और उपलोकायुक्त का कार्यकाल छह के बजाय आठ साल का हो जाएगा। वहीं अब यह भी प्राविधान होगा कि लोकायुक्त किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराने वाले पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगा सकेंगे।
विधेयक में यह भी व्यवस्था की गयी है कि लोकायुक्त और उपलोकायुक्त उस वक्त तक पद पर बने रहेंगे जब तक उनके स्थान पर अन्यअधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो जाती। इसमें कहा गया है कि शिकायतकर्ता का दावा गलत होने पर उस पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा, अगर वह यह धनराशि दो माह के अंदर नहीं चुकाता है तो उसे उसकी संपत्ति से भू-राजस्व की तरह वसूला जाएगा।
गौरतलब है कि राज्य विधानसभा ने उत्तर प्रदेश लोकायुक्त एवं उपलोकायुक्त 'संशोधन विधेयक गत 18 जून को पारित किया था, जिसके बाद उसे विधान परिषद में भेजा गया था मगर उच्च सदन ने उस बिल को लोकायुक्त एवं उपलोकायुक्त के कार्यकाल को घटाकर पांच साल करने की संस्तुति के साथ वापस विधानसभा को भेज दिया था। बाद में इस विधेयक को एक बार फिर विधानसभा में पेश किया गया था जहां विधान परिषदकी संस्तुति को खारिज करके उसे मंजूरी के लिये राज्यपाल को भेज दिया गया था।












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