ममता के सामने 28 हजार करोड़ का पैकेज ले उडे़ नीतीश

योजना आयोग ने बिहार के लिये 28,000 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना को आज मंजूरी दे दी। आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया तथा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच बैठक में 2012-13 की वार्षिक योजना को मंजूरी दी गयी। यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 16.66 प्रतिशत अधिक है।
पिछले वित्त वर्ष में 24,000 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना को मंजूरी दी गयी थी। इस मौके पर अहलूवालिया ने बिहार के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि राज्य विकास के रास्ते पर अग्रसर है और विकसित राज्यों की कतार में खड़ा होने के लिये तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने राज्य सरकार को विशेष सहायता पैकेज 12वीं योजना में जारी रखने का आश्वासन दिया।
आयोग इसके लिये जल्दी ही केंद्र सरकार से मंजूरी मांगेगा और इसके लिये मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्ताव रखेगा। बैठक के बाद कुमार ने संवाददाताओं से कहा कि हमने बैठक 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) के दौरान हर साल 4,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मांगा।
राज्य को 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-12) के दौरान 10,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दिया गया। चूंकि 12वीं योजना शुरू हो चुकी है, ऐसे में आयोग को केंद्रीय पैकेज जारी रखने को लेकर केंद्र से मंजूरी लेने की जरूरत है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बैठक के दौरान आयोग को राज्य की उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि राज्य का अगली योजना में 13 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य है। कृषि क्षेत्र में 7 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिये खाका तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिये टपक और स्पिकल सिंचाई व्यवस्था को प्रोत्साहित किया जाएगा। कुमार ने कहा कि बुनियादी ढांचा खासकर सड़क, बिजली तथा सिंचाई उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे उपर है।
इन क्षेत्रों को राज्य के विकास के लिये महत्वपूर्ण माना गया है और केंद्र को इसके लिये विशेष सहायता देनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने आयोग से राज्य को विशेष श्रेणी का दर्जा दिये जाने के अनुरोध पर विचार करने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष दर्जा दिये जाने के मानदंडों की समीक्षा किये जाने की जरूरत है।
उन्होंने आयोग को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पंचायती राजय संस्थानों को मजबूत बनाने को लेकर प्रतिबद्ध है। कुमार ने कहा कि 11वीं योजना (2007-12) में अनुमानित व्यय 76,481.77 करोड़ रुपये (2006-07 के मूल्य पर) था। 11वीं योजना के दौरान व्यय (अस्थायी) 99.42 प्रतिशत रहा।
12वीं योजना के लिये अनुमानित व्यय 269458.50 करोड़ रुपये है जो पिछली योजना के मुकाबले 352.32 प्रतिशत अधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित व्यय का बड़ा हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, जल आपूर्ति तथा साफ-सफाई, शहरी विकास जैसे सामाजिक क्षेत्रों पर खर्च किया जाएगा।












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