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अभी भी खौफ में जी रहे हैं लखनऊ के सीएमओ

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लखनऊ। दो सीएमओ और एक डिप्‍टी सीएमओ की हत्‍या के करीब एक साल बीत जने के बाद भी लखनऊ के सीएमओ खौफ में जी रहे हैं। यही कारण है कि सीएमओ को सुरक्षा प्रदान की गई है। सीएमओ लखनऊ ने खुद की जान को खतरा बताते हुए प्रशासन से सुरक्षा गार्डों की मांग की थी जिसे स्वीकृत कर लिया गया। शुक्रवार को सीएमओ डा. एसएनएस यादव को एक गार्ड मिल गया जबकि दूसरा भी जल्द ही आ जाएगा। हालांकि सीएमओ डा. यादव इस बात से इनकार करते हैं कि उन्होंने सरकार से सुरक्षा मांगी थी जबकि हकीकत यह है कि सरकार में गहरी पैठ रखने वाले डा. यादव की ही मांग पर उन्हें सुरक्षा मुहैया करायी गयी है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. यादव की जान को खतरा है लेकिन यह खतरा उन्हें किससे हैं इस बात का जवाब न तो सीएमओ लखनऊ के पास है और न ही स्वास्थ्य विभाग के किसी आला अधिकारी के पास, बावजूद इसके उन्हें सुरक्षा मुहैया करा दी गयी। ज्ञात हो कि सीएमओ परिवार कल्याण डा. विनोद आर्या एवं डा. वीपी सिंह की हत्या कर दी गयी थी।

तथा डिप्टी सीएमओ डा. वाईएस सचान की जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी तीन चिकित्साधिकारियों की मौत का हवाला देते हुए सीएमओ लखनऊ ने गृह विभाग से खुद के लिए सुरक्षा की मांग कर ली। हालांकि वर्तमान सीएमओ डा. यादव का न तो एनआरएचएम घोटाले से कोई सीधा सम्बंध था और न ही वह किसी अन्य मामले में ही शामिल थे बावजूद इसके उनका सरकार से सुरक्षा मांगना कर्ई सवाल खड़े करता है।

हालांकि वह इस बात से इनकार करते हैं कि उन्हें किसी प्रकार की धमकी आदि मिली है लेकिन उन्होंने सुरक्षा अवश्य ले ली। सीएमओ के करीबी बताते हैं कि सुरक्षा उन्होंने किसी डर या दहशत में नहीं बल्कि अपनी पहुंच का अहसास कराने के लिए ली है। डा. यादव भी इस बात को पुख्ता करते हैं कि सुरक्षा से कुछ नहीं होता बावजूद इसके वह गार्डों के साथ ही बाहर निकलना चाहते हैं।

स्वास्थ्य भवन के अधिकारी बताते हैं कि उनकी जान को कोई खतरा नहीं है क्योंकि उनका किसी घोटाले से कोई सम्बंध नहीं लेकिन कुछ अधिकारियों का ऐसा तर्क हैं कि वर्तमान चिकित्साधिकारियों के बारे में जानकारी देना तथा कर्मचारियों पर कार्यवाही करना उनका कार्यक्षेत्र है इस वजह से उनकी जान को खतरा है। इसी खतरे को देखते हुए डा. यादव को सुरक्षा मुहैया करायी गयी है।

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English summary
After the year of three CMO's killed in Lucknow the CMO in Lucknow is still living with the afraid of death.
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