• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

परिवार नियोजन पर अब ध्यान दें देशवासी: विशेषज्ञ

By Belal Jafri
|

family planning
नयी दिल्ली। भारत में 50 फीसदी से अधिक आबादी के प्रजनन आयु में होने की वजह से हर साल जनसंख्या में करीब 1.8 करोड़ का आंकड़ा जुड़ जाता है जबकि परिवार नियोजन के सफल कार्यान्वयन से न केवल मातृमृत्यु दर, शिशु मृत्युदर को कम किया जा सकता है बल्कि अशिक्षा, गरीबी से लेकर एचआईवी एड्स सहित कई समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।

परिवार नियोजन की दिशा में और अधिक प्रयास करने की वकालत करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य योजना उपायुक्त सुषमा दुरेजा ने भाषा से कहा जिला अस्पतालों में परिवार नियोजन के बारे में व्यापक काउंसलिंग मुहैया कराने के लिए काउंसलरों की नियुक्ति करने का प्रस्ताव है। ये काउंसलर गर्भ निरोध के विकल्प, प्रसव के पश्चात काउंसलिंग, प्रजनन संबंधी अन्य विषयों पर परामर्श देंगे।

प्रजनन स्वास्थ्य एवं परिवार नियोजन के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय संगठन पापुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया पीएफए की कार्यकारी निदेशक पूनम मुटरेजा ने कहा परिवार नियोजन के लिए काउंसलिंग मददगार साबित हो सकती है। वर्तमान में काउंसलिंग की सुविधा हर जगह उपलब्ध नहीं है जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर इसकी बहुत जरूरत है।

गर्भ निरोध को परिवार नियोजन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी में प्रोफेसर गीता सेन ने कहा कि देश में करीब 12.5 फीसदी महिलाएं या तो देर से बच्चे चाहती हैं या और बच्चे नहीं चाहतीं। लेकिन वह परिवार नियोजन के कारगर तरीके का उपयोग नहीं करतीं। इसके फलस्वरूप, अनचाहे ही परिवार बढ़ जाता है।

प्रो सेन के अनुसार, यह स्थिति तब है जब देश में 50 फीसदी से अधिक आबादी के प्रजनन आयु में होने की वजह से हर साल जनसंख्या में करीब 1.8 करोड़ का आंकड़ा जुड़ जाता है और गरीबी, अशिक्षा, एचआईवी एड्स जैसी बीमारी से लेकर सामाजिक जटिलताओं में उल्लेखनीय कमी भी नहीं आ पा रही है। निश्चित रूप से गर्भ निरोध और परिवार नियोजन पर बहुत प्रयास करने की जरूरत है।

लिंगभेद के मुद्दे पर कई वृत्त चित्र बना चुकीं लवलीन थडानी के मुताबिक, पिछड़े इलाकों और गांवों में बेटे की चाहत में परिवार बढ़ता जाता है। परिवार में बेटियों को बेटों के बराबर समझने में लंबा समय लगेगा। शहरों में भी लगभग यही स्थिति है। ऐसे में परिवार नियोजन के बारे में काउंसलिंग बहुत जरूरी हो जाती है। लवलीन ने कहा कि देश में परिवार नियोजन पर उस तरह ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिस तरह दिया जाना चाहिए जबकि इससे कई समस्याओं का हल निकाला जा सकता है।

स्त्री रोग विशेषग्य डॉ अर्चना धवन बजाज ने कहा कि देश में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान विभिन्न जटिलताओं के चलते प्रति एक लाख जीवित जन्म पर मातृमृत्यु दर का आंकड़ा 200 से अधिक है। इसका मुख्य कारण स्तरीय परिवार नियोजन सेवाओं तक पहुंच में कमी है। यदि परिवार नियोजन पर समुचित ध्यान दिया जाए तो मातृमृत्यु दर में एक तिहाई तक कमी लाई जा सकती है।

गत आठ जून को भारत में परिवार नियोजन पर सामाजिक संगठनों की एक राष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई थी। फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया पीएफए इंडिया और उसके सहयोगियों द्वारा आयोजित इस बैठक में सरकारी अधिकारियों तथा 13 राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

पीएफए इंडिया के महासचिव विश्वनाथ कोलीवाड ने कहा बैठक का उद्देश्य देश में परिवार नियोजन कार्यक्रम में योगदान देना था। हम चाहते हैं कि इसके माध्यम से हमारी आवाज जुलाई में लंदन में होने जा रहे ग्लोबल एफपीए सम्मेलन तक पहुंचे और परिलक्षित भी हो।

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
In India, more than 50 per cent of the population are in their reproductive age. AS a result our population increases each year and this figure is about 1.8 million figure per year So taking a very serious note on the issue experts emphasised on family planning and its technique.
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more