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यौन अपराध बढ़ा सकता है मॉडल्‍स का न्‍यूड होना

By Ajay Mohan
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डा. आलोक चांटिया

केकेआर की जीत के बाद पूनम पांडेय न्‍यूड हो गईं। उनसे एक कदम आगे बढ़ते हुए रोजलिन खान ने भी कपड़े उतार दिये। इसी तरह मॉडलिंग की किताब के पन्‍ने पलटें तो वीना मलिक, कश्‍मीरा शाह, समेत कई हीरोइने व मॉडल्‍स न्‍यूड व सेमीन्‍यूड हो चुकी हैं। जिस रफ्तार से न्‍यूडिटी बढ़ रही है उसी रफ्तार से हमारा समाज पशु संस्‍कृति की ओर बढ़ रहा है! अररे ये मैंने क्‍या कह दिया? सही तो कहा है! "हम सब नग्न ही पैदा होते हैं और सभी जीव जन्‍तु जीवन भर नग्न रहते हैं।"

मानव ने संस्कृति बना कर एक ऐसा विकल्प तैयार किया, जिससे कालांतर में हमारा ऐसा मनोवैज्ञानिक विकास किया कि कपड़े उतरना सबसे बड़ा अपराध बन गया। पर कपड़े उतरने के पीछे क्या दर्शन काम कर रहा है, उसको भी ध्यान में रख कर ही पोर्न मुद्दे पर एक सार्थक बात रखी जा सकती है।

सबसे पहले तो यह बात समझना होगा कि कपड़े संस्कृति के एक ऐसे वाहक के रूप में स्थापित हुए जिसने यह संदेश देने में सफलता पाई कि मानव के जीवन में नग्नता, प्रजनन, आदि का महत्त्व तो है पर सिर्फ यही एक काम मानव का शेष हो, ऐसा नहीं है। क्योकि संस्‍कृति के अनुरूप आने को सामाजिक बनाये रखने और एक जैविक मानव से ज्यादा सांस्कृतिक मानव के रूप में खुद ओ स्थापित करने के लिए यह जरुरी था कि मानव, जानवरों के क्रिया कलापों से इतर एक ऐसी व्यवस्था का पोषक बने जिससे उसमें और जानवर में सीधा अंतर किया जा सके। इसी कड़ी में मानव का कपड़े पहनना एक विशेष सांस्कृतिक बन गई। इसके बाद से किसी का भी सार्वजनिक स्थान पर कपड़े उतरना और नग्न प्रदर्शन करना एक अपसंस्कृति का कार्य माना जाने लगा। यदि कुछ लोगों को कपड़े उतारना गलत नहीं लगता है तो इसका मतलब साफ है कि उन्‍हें सड़क पर यौन संबंध बनाना, प्रजनन करना आदि भी गलत नहीं लगना चाहिये।

ऊपर इन सब से यह बात उभर कर जरुर आती है कि फिर नग्न घूम रहे जानवर और खुले रूप से संभोग कर रहे जानवर से हम अपने को अलग कैसे करेंगे? हो सकता है कि लोग इसे व्यक्तिगत सवाल समझें, पर वह व्यक्तिगत कैसे हो सकता है जब आप अपने शरीर का प्रदर्शन एक समाज में कर रही हों, जहां का अधिकांश व्यक्ति ऐसी क्रिया पसंद नही कर रहे हैं।

इसका सीधा एक ही जवाब है कि मानव तो नंगे भालू और बंदर का नाच देखता है तो क्या वह खुद भालू-बंदर हो जायेगा? और रही यह बात कि क्यों और क्या प्रभाव पड़ेगा तो, पियाजे का नैतिकता का सिद्धांत याद करना होगा, जिसने लिखा कि 5 वर्ष तक के बच्चे को जो भी दिखाया या सिखाया जाता है वह अपने पूरे जीवन न तो भूलता है और न ही छोड़ता है।

कैसे प्रभावित होते हैं बच्‍चे

इस सिद्धांत पर गौर करें तो हम अपने बच्‍चों के सामने क्‍या परोस रहे हैं। आज बच्चा पैदा होने के बाद से ही नग्नता देखने लगता है। बड़े होते-होते इंटरनेट पर न्‍यूड फोटो और वो भी प्रख्‍यात सेलेब्रिटीज़ के, देखकर प्रभावित होने लगता है। देखते ही देखते समय आयेगा जब उसे नग्नता में कोई बुराई नहीं नजर आती। सच पूछिए तो वह बच्‍चा आगे चलकर एक पुशु समाज का हिस्सा बनता जाएगा।

इसे अगर भारत के नजरिये से देखा जाये तो लगातार एक के बाद एक मॉडल न्‍यूड हो रही हैं। बच्चो में सेक्स के प्रति रूचि बढ़ी है। शिष्‍टता में कमी आई है। बिना विवाह के गर्भपात के केस बढे़ हैं। इन सबसे यही सिद्ध होता है कि बच्चो में न्‍यूडिटी का प्रभाव पड़ रहा है और नैतिक मूल्य घट रहे हैं।

अगर फिल्‍मों और ग्‍लैमर की दुनिया में देखें तो बड़े अभिनेता ने कभी अपनी बेटियों को फिल्म में लेने कि कोशिश नहीं की और अगर उसने इसी फिल्‍म अभिनेत्री से शादी की तो उसे फिल्म में काम नही करने दिया। अब आप ही सोच लें की नग्नता परोसने वाले खुद इस तरह के काम को कितना ख़राब समझते हैं और कितना इससे परहेज़ करते हैं।

मीडिया का रोल

जहां तक बात मीडिया की है तो मीडिया एक आर्थिक कार्य ज्यादा है और इसीलिए उसने संचार के नाम पर कुछ भी छापना स्वीकार कर लिया है। इसके कारण जो बातें कभी समाज के लिए गोपनीय हुआ करती थीं वह बड़ी आसानी से जनता तक उपलब्द्ध हो गई हैं। बुक स्टाल पर कोई ऐसी किताबों को हाथ नहीं लगाता था, जिस पर किसी नग्न महिला की तस्वीर बनी हो, क्योकि उससे समाज में उसका चरित्र गिर सकता था। पर आज आलम यह है कि जितनी नग्‍न तस्‍वीरें होंगी, मैगजीन या समाचार पत्र उतने ज्‍यादा बिकेंगे।

आये दिन टीवी पर नग्‍नता से भरे विज्ञापन दिखाये जाते हैं, जिन्‍हें घर में छोटे-छोटे बच्‍चे भी देखते हैं। आप अपने बच्‍चों को फिल्‍में देखने से रोक सकते हैं, लेकिन विज्ञापन से नहीं। कुल मिलाकर देखा जाये तो बच्‍चों के दिलों और दिमाग पर सेक्‍स, न्‍यूड, आदि जैसे शब्‍दों का घर कर जाना समाज में कैंसर को न्‍योता दे रहा है। वो कैंसर जो जन्‍म देता है बलात्‍कार, शादी से पहले प्रेगनेंसी, किशोरावस्‍था में चोरी छिपे यौन संबंध, छोटे-छोटे बच्‍चों में सेक्‍स के प्रति ललक और तो और ऐसे लोग जिनकी मानसिकता सेक्‍स के इर्द-गिर्द घूमती है वही आगे चलकर हवस के पुजारी हो जाते हैं। यही वो लोग होते हैं जो सेक्‍स की भूख के आगे बच्चियों तक को नहीं छोड़ते। लेख के अंत में आपके लिए एक सवाल छोड़ रहा हूं? अब अगर कोई सेलेब्रिटी न्‍यूड होती है, तो आपके मन में सबसे पहले क्‍या आयेगा?

लेखक परिचय- डा. आलोक चांटिया अखिल भारतीय अधिकार संगठन के अध्‍यक्ष हैं, श्री जयनारायण पीजी कॉलेज, लखनऊ के शिक्षक व इग्‍नू के काउंसिलर हैं।

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English summary
Every day the models getting nude are actually affecting the minds of our children. This is because whatever children see in first 5 years of age he or she never forget it and also try to adopt it.
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