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प्रधानमंत्री के खिलाफ आरोपों पर यकीन करना बेहद मुश्किल: हेगड़े

Justice Santosh Hegde
दिल्‍ली। उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े ने आज कहा कि टीम अन्ना की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर लगाए गए आरोपों पर यकीन करना बेहद मुश्किल है। हालांकि, खुद भी टीम अन्ना के सदस्य हेगड़े ने स्पष्ट किया कि यदि कोई ऐसे दस्तावेज हैं जिनसे किसी तरह की अनियमितता की बात साबित होती है तो मामले की जांच करायी जानी चाहिए। हेगड़े ने कहा, प्रधानमंत्री को इतने सालों तक देखने के बाद उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर यकीन करना मेरे लिए बेहद मुश्किल है।

हालांकि, यदि किसी ने कहा है कि यह एक दस्तावेजी रूप में है तो मेरा मानना है कि इसकी जांच होनी चाहिए। कर्नाटक के लोकायुक्त रहे हेगड़े की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब प्रधानमंत्री ने यह बयान दिया था कि कोयले के ब्लॉक के आवंटन के मामले में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप यदि साबित हो गए तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। हेगड़े ने कहा कि वकील प्रशांत भूषण ने पाया है कि सीएजी रिपोर्ट और कोयला मंत्रालय की ओर से दिए गए मंतव्य सहित कई ऐसे दस्तावेज हैं जिनमें नीलामी के बगैर कोयले के ब्लॉकों का आवंटन नहीं करने की सलाह दी गयी थी।

हेगड़े ने कहा, यदि ऐसे दस्तावेज मौजूद हैं तो मेरा मानना है कि मामले की जांच होनी चाहिए। पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि टीम अन्ना ने जांच की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को जो दस्तावेज भेजे थे उसे उन्होंने नहीं देखा है। हेगड़े ने कहा, टीम अन्ना की ओर से लगाए गए आरोपों के बारे में मेरे पास कोई तथ्य नहीं हैं। प्रशांत भूषण की ओर से प्रधानमंत्री के लिए एक खास शब्द के इस्तेमाल का हेगड़े ने एक बार फिर यह कहते हुए विरोध किया, मुझे यह पसंद नहीं आया।
लिहाजा मैं खुद को उस बयान से दूर रखना चाहूंगा। प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए भूषण ने कहा था कि टीम अन्ना की ओर से लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद करार देने से पहले उन्हें आरोप पत्र के साथ मौजूद दस्तावेजों को देखना चाहिए था। प्रशांत भूषण ने कहा, उन्हें बिंदुवार और तथ्य दर तथ्य अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि कार्यकर्ताओं की ओर से प्रधानमंत्री पर आरोप नहीं लगाए गए हैं बल्कि वे तो सीएजी रिपोर्ट के हिस्से हैं।

केजरीवाल ने कहा, यह कहना सही नहीं होगा कि सीएजी की रिपोर्टें गैर-जिम्मेदाराना है क्योंकि यह एक संवैधानिक संस्था है। पूर्व आईपीएस अधिकारी और टीम की सदस्य किरण बेदी ने कहा, प्रधानमंत्री बराबर लोगों में से पहले हैं। यदि उनके बराबर के लोगों के बारे में किसी तरह की शंका है तो सचाई जानने के लिए एक एसआईटी का गठन बेहतर नेतृत्व होगा।

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