सरकारी विज्ञप्ति में नाम देख भड़के स्वामी प्रसाद

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि श्री यादव ने सुबह नाश्ते पर विपक्षी दलों को आमंत्रित किया था लेकिन विपक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार के कार्यकाल में मु यमंत्री के आमंत्रण पर नहीं आने की पर परा सपा ने ही डाली थी। उन्होंने उसी पर परा के तहत ही मु यमंत्री के आमंत्रण का बहिष्कार किया। इसके बावजूद सरकारी विज्ञप्ति में उनका नाम वहां जाने वाले नेताओं में शामिल किया गया है।
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष ने इसे सपा की साजिश करार दिया। उन्होंने सपा शासन को नाकाम बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीद में घटतौली को स्वयं देखा इससे समझा जाना जा सकता है कि घटतौली का आलम क्या होगा। बसपा नेता ने कहा कि इस सबके बीच मु यमंत्री की चाय पीना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है इसीलिए उन्होंने नाश्ते के कार्यक्रम का बहिष्कार किया।
दूसरी ओर कांग्रेस विधानमण्डल दल के नेता प्रमोद तिवारी, भाजपा विधानमण्डल दल के नेता हुकुम सिंह, राष्ट्रीय लोकदल के दलवीर सिंह, पीस पार्टी के डा. अयूब. अपना दल की अनुप्रिया पटेल, शिक्षक दल के ओम प्रकाश शर्मा समेत कई नेता मु यमंत्री के आमंत्रण पर उनके सरकारी आवास पहुंचे और सदन की कार्यवाही में सहयोग देने का आश्वासन दिया।
वहीं सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बसपा के न आने पर कहा कि बसपा ने लोकतांत्रिक मूल्यों का सदैव दमन किया है इसलिए मु यमंत्री की चाय पर नेता विपक्ष का नहीं आना चौंकाने वाली बात नहीं है। राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि विधानसभा में नेता विपक्ष रहते हुए सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव तत्कालीन मु यमंत्री मायावती के सरकारी आवास पर एक बैठक में भाग लेने गये थे। विपक्षी नेता का यह कहना कि सपा ने लोकतांत्रिक पर पर परायें तोड़ी हैं यह गलत और भ्रामक है।












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