प्रधानमंत्री से मिलने चलीं उमा भारती

सुश्री उमा भारती ने प्रधानमंत्री को गत 19 मई को पत्र भेजा। उन्होंनें पत्र में कहा है कि उत्तराखंड में अलकनंदा नदी पर श्रीनगर जल बिजली परियोजना से धारी देवी डूब सकती हैं। ज्ञात हो कि इसे बचाने के लिये उन्होंनें पिछले साल अनशन किया था। अनशन के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया था कि परियोजना में फेरबदल किया जायेगा ताकि धारी देवी को डूबने से बचाया जा सके।
इसके बावजूद परियोजना में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया और पिछले महीने उत्तराखंड गयीं सुश्री उमा भारती ने देखा कि परियोजना का काम पहले की तरह ही चल रहा है। सुश्री उमा भारती ने कहा कि धारी देवी उत्तराखंड की रक्षक देवी मानी जाती हैं और बांध की ऊंचाई से उनके पवित्र स्थल के डूब जाने का खतरा बना हुआ है।
उन्होंनें पत्र में गंगा की अविरल धारा के लिये वाराणसी में हो रहे आन्दोलन का भी सवाल उठाया है। उन्होंनें प्रधानमंत्री से शिकायत की है कि गंगा के लिये आन्दोलन कर रहे ज्ञान स्वरूप सानंद से मिलने का वायदा किया गया था जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया। प्रधानमंत्री के दो प्रतिनिधि दो दिन पहले वाराणसी गये थे और बिना मिले ही वापस लौट गये। सुश्री उमा भारती ने कहा कि गंगा बेसिन प्राधिकरण से जो अपेक्षा थी वह पूरी नहीं हो पा रही है।
प्रधानमंत्री के जो प्रतिनिधि 19 मई को आये थे। वह गंगा सेवा अभियान के समन्वयक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एवं पर्यावरणविद स्वामी सानंद से मिले थे। काफी लम्बी बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नही निकला था और वह वापस चले गये थे।












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