मैं आरुषि हूं...चार साल पहले मेरा कत्ल हुआ था

मैं आरुषि, क्या तुम मुझे जानते हो? क्या मुझे पहचानते हो? अरे मैं तो भूल ही गयी कि आरुषि दूरदर्शन की सुर्खियों में आती है और उसे सारी दुनिया पहचानती है। मैं अपने मां बाप की इकलौती संतान, मुझे माता पिता पर था पूरा अभिमान। मैं अपने दोस्तों में भी प्यारी थी, मेरी दुनिया बड़ी न्यारी थी। मुझे नहीं मालूम कि मैने ऐसा क्या किया था, जो मेरे साथ ऐसा हादसा हुआ था। मैं तो अपने जन्म-दिन के ताने बाने बुन रही थी, ख्वाबों में परी बन गहरी नींद सो रही थी।
मेरा कत्ल हुआ ये तो मैने जाना है, पर क्यों और किसने किया ये मेरे लिए भी अंजाना है। यहां से मैं देखती हूं कि मेरे जन्मदाता मेरे कत्ल के जुर्म में गिरफ्तार हैं, क्या सच ही वो गुनहगार हैं। हथकड़ी पहना जब तुमको ले जाया जा रहा था तो मेरे मन में केवल ये ख्याल आ रहा था कि क्या कोई पिता कर सकता है ऐसा इतिहास में भी कोई उदाहरण नही मिलेगा इस जैसा। पापा, सच ही मैं तुम्हारे दुख से दुखी हूं, तुम जिसमें खुश हो उसी में मैं सुखी हूं। दुनिया को तो पापा कुछ भी कहना आता है लेकिन तुम्हारा मेरा तो बाप बेटी का नाता है।
और पापा यदि तुम कातिल साबित भी हो जाते हो तो मेरा दिल इस बात कि गवाही नही देगा लोग चाहे कुछ भी कहते रहें मेरा विश्वास तुम पर से नही डिगेगा। मगर पापा सच ही तुम कातिल हो तो भी ये बात किसी से ना कहना मैं तुम्हारा आभार मानूंगी तुम मेरी ये बात मान लेना यदि किसी को भी इस बात का पता चल जाएगा तो रिश्तों पर से सबका विश्वास उठ जाएगा। और देखो मेरे मरने के बाद मेरे चरित्र पर लांछन लगा दिया है ये सब तुम्हारी दुनिया का ना जाने क्या सिलसिला है। आज मैं खुश हूँ कि मैं उस जहाँ में नही बल्कि दिव्य लोक में रहती हूं कम से कम यहां मैं अपने आप को सुरक्षित महसूस करती हूं सुरक्षित महसूस करती हूँ।
आरुषि हत्याकांड के चौथी बरसी पर ये चंद लाइने सोशल नेटवर्क साइट फेसबुक पर आसानी से देखने को मिल रहे हैं। जी हां आरुषि तलवार और हेमराज हत्याकांड के आज चार साल पूरे हो गये मगर आज भी देश की ये सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री सुलझ नहीं सकी है। आखिर चार साल में कहां तक पहुंचा यह मामला? आखिर क्यों यह हत्याकांड इतना लंबा खिंचता चला गया। एक तरफ कटघरे में खुद आरुषि के मां बाप हैं तो दूसरी तरफ सीबीआई जो अबतक सबूतों को खंगाल रही है।
आरुषि हत्याकांड के चौथी बरसी पर आज एक बार फिर कुछ उन तथ्यों पर चर्चा करते हैं जिनके आधार पर सीबीआई उसके माता-पिता को हत्याकांड में शामिल होना मानती है। सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर नजर डालें तो कई ऐसे पहलू हैं जो डॉक्टर तलवार के इस हत्याकांड में शामिल होने के संकेत देते हैं।
आरुषि व हेमराज का गला जिस सफाई के सर्जिकल औजार से काटा गया वैसा प्रशिक्षित व्यक्ति ही कर सकता है और तलवार दंपति चिकित्सक होने के नाते ऐसा कर सकते हैं।
- आरुषि के मोबाइल से जिस तरह के आंकड़े मिटाए गए थे किसी सामान्य अपराधी से ऐसा करने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
- 16 मई की सुबह को जैसे ही पुलिस घर पहुंचती है आरुषि के पिता राजेश उसे हेमराज को तलाशने के बहाने घर से बाहर भेज देते हैं।
- राजेश तलवार के टैरेस पर लगे ताले को खोलने के लिए चाबी मांगने पर भी टाल देते हैं जबकि टैरेस के दरवाजे पर खून के धब्बे दिखाई दे रहे थे।
- टैरेस पर हेमराज के शव को पहचानने से भी राजेश इन्कार कर देते हैं। बाद में किसी नौकर द्वारा उसकी शिनाख्त की गई।
- आरुषि के साथ दुष्कर्म का उल्लेख पोस्टमार्टम में न देने के लिए दबाव बनाते हैं।
- टैरेस पर हेमराज के शव का खोजा जाना कोई संयोग नहीं था बल्कि सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी को विधिवत फोन करके राजेश के निकट मित्र चौधरी ने बुलाया था।
- गोल्फ स्टिक को राजेश गायब बता रहे थे। उन्हीं के अनुसार कुछ दिन बाद ही वह घर में मिल गई और उन्होंने इसकी सूचना नहीं दी, बल्कि एक साल बाद जांच के दौरान अधिकारियों को दी गई।
- परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के अनुसार गोल्फ स्टिक से हत्या की गई। जिसका संकेत है कि हत्या अचानक किसी बात से उत्तेजित होकर की गई।
- पोस्टमार्टम से ठीक पहले राजेश के भाई डॉ. दिनेश तलवार ने पोस्टमार्टम करने वाले नोएडा के चिकित्सक से एम्स के फारेंसिक विभाग के अध्यक्ष डा. डोगरा से बात कराई। इससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक को प्रभावित करने का प्रयास किया था।












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