डाकघरों में खुलेंगे बैंक, कवायद शुरू

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दिल्ली (ब्यूरो)। संचार की दुनिया यानी इंटरनेट और मोबाइल के सस्ता होने के कारण बेमकसद होती जा रहे डाकघरों को बचाने की कवायद शुरू हो गई है। सरकार ने डाकघरों में बैंक की सुविधा देने का फैसला किया है। हालांकि इसके पहले तमाम फंडे आजमाए जा चुके हैं , लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ। इसका नाम पोस्ट बैंक आफ इंडिया ( पीबीआई) दिया गया है।

योजना को अमली जामा पहनाने के लिए डाक विभाग अब सलाहकारों की मदद लेगा। विभाग ने इस संबंध में कई फर्मों को आमंत्रित करते हुए उनसे कार्य योजना का प्रस्ताव मांगा है। हालांकि डाकघरों में बैंकिंग जैसी कुछ सुविधाएं पहले से हैं लेकिन कभी भी उसका दायरा नहीं बढ़ सका है। पीपीएफ से लेकर पेंशन स्कीम तमाम बचत योजनाएं डाकघरों में चल रही हैं, लेकिन डाकघरों का रंगरुप ऐसा है कि अमूमन लोग बैंकों को तरजीह देते हैं। दूसरी बड़ी समस्या है अभी भी डाकघरों में ज्यादातर काम मैनुअल होता है। इसमें काफी वक्त लगता है। पैसे की आवाजाही कम है। डाक घरों में बैंकिंग सेवाएं चालू करने के लिए सबसे पहले उसे कैबिनेट की स्वीकृति और बैंक के रूप में काम करने के लिए रिजर्व बैंक की मंजूरी लेनी होगी। कार्य योजना के तहत कंसल्टेंसी फर्म डाक विभाग को पोस्ट बैंक शुरू करने के लिए जरूरी आधाभूत ढांचे, लागत आदि के बारे में बताएगी।

हालांकि योजन है कि बैंकों की तरह जमा पैसा पर ब्याज का भुगतान किया जाएगा साथ ही ही कर्ज देने का काम भी किया जाएगा। चूकि डाकघरों का जाल पूरे देश में फैला हुआ है । इसलिए गांवों में इसका काफी फायदा उठाया जा सकता है। फिलहाल डाक विभाग देशभर में फैले करीब 1.54 लाख डाकघरों के जरिये सात तरह की लघु बचत योजनाओं का संचालन कर रहा है और इसके खाताधारकों की संख्या 25 करोड़ के आसपास है। किताबी रुप से यह योजना बेहतर लग रही है, लेकिन जबतक डाकघरों का आधुनिकी करण नहीं होगा तब तक आम लोगों को वहां तक खींच पाना शायद मुमकिन नहीं हो सकेगा।

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