मोदी का आरोप, सुरक्षा को लेकर केंद्र नहीं है गंभीर

उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा को अलग थलग करके नहीं देखा जा सकता है क्योंकि यह वाह्य सुरक्षा हालात से जुडी हुई और घुसपैठ रोकने, उग्रवाद को रोकने में सशस्त्र बल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो देश के आंतरिक सुरक्षा से सीधे तौर पर जुडा है।
मोदी ने कहा कि इसी परिप्रेक्ष्य में संसाधन की बाधाओं, अधिकारियों और जवानों में नैतिक मनोबल की कमी और असैन्य एवं सैन्य इकाइयों के बीच तनाव के फलस्वरूप हमारी रक्षा क्षमताओं में किसी तरह की खामी से निश्चित तौर पर देश की आंतरिक सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पडेगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को अविश्वास एवं संदेह के इस माहौल को खत्म करने के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए जो हाल ही में हुए विवादों के कारण पैदा हुआ है।
सुरक्षा से जुडे महत्वपूर्ण मसलों पर राज्य सरकारों से सलाह मशविरा नहीं करने के लिए केन्द्र सरकार की आलोचना करते हुए मोदी ने कहा कि आरपीएफ कानून, बीएसएफ कानून में संशोधन कर केन्द्र सरकार राज्य के भीतर राज्य का गठन कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) सहित केन्द्रीय एजेंसियों का राजनीतिकरण बढ रहा है और उनका इस्तेमाल केन्द्र में सत्ताधारी दल के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने में हो रहा है।
मोदी ने कहा कि इस रूख से सीबीआई जैसी एजेंसियों की विश्वसनीयता के साथ समझौता हुआ है और यह चिन्ता की बात है क्योंकि ये एजेंसियां आंतरिक सुरक्षा के मसलों में शामिल हैं। उन्होंने केन्द्र के इन दावों पर भी सवाल उठाया कि 97 फीसदी खुफिया खबरें केन्द्रीय एजेंसियों की ओर से आ रही है और राज्य एजेंसियों की ओर से केवल तीन प्रतिशत खबरें आती हैं।
खुफिया प्रकोष्ठों की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से मोदी ने अखिल भारतीय सेवा की तर्ज पर अखिल भारतीय खुफिया सेवा शुरू करने की अपील दोहरायी। उन्होंने संकेत किया कि भारत सरकार को उन राज्यों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए जहां शांति है और जो नक्सलवाद की समस्या से फिलहाल प्रभावित नहीं हैं।












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