शहरी गरीबों पर सोनिया की नजर

परिषद ने केंद्र से आग्रह किया है कि शहरी बेघर लोगों की गंभीर समस्या को देखते हुए तत्काल उचित कदम उठाया जाए। सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए एनएसी ने मांग की है कि प्रति एक लाख की जनसंख्या पर 100 लोगों की क्षमता वाली सर्व सुविधा संपन्न आश्रय स्थल बनाया जाए या 50 लोगों की क्षमता वाले दो आश्रय स्थल बनाए जाएं। परिषद की सिफारिशों में कहा गया है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत एक लाख से ज्यादा आबादी वाले 499 शहरों के बेघर लोगों के लिए छत की सुविधा मुहैया करा देनी चाहिए।
कुल बेघर लोगों के 15 प्रतिशत जनसंख्या, जिसमें एक प्रतिशत शहरी गरीब भी शामिल हैं, को छत मुहैया कराने से सभी शहरी गरीबों को आश्रय स्थल उपलब्ध हो जाएगा। एनएसी के अनुसार इस समय अनुमानत: एक प्रतिशत शहरी लोग बेघर हैं, और देश भर में शहरी बेघर लोगों की संख्या लगभग 30 लाख है। गौरतलब है कि 2001 की जनगणना के अनुसार कुल 1.94 मिलियन लोगों के पास रहने के लिए घर नहीं था। इनमें से 1.16 मिलियन लोग गांवों में रहते हैं, शहरों में ऐसे लोगों की संख्या महज 0.77 मिलियन ही है। यह आंकड़े एनएसी के आंकड़ों से काफी कम है।












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