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फर्जी था जसविंदर एनकाउंटर, 17 पुलिसवालों को उम्र कैद

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Fake Encounter
दिल्ली (ब्यूरो)। बीस साल पहले बिजनौर में हुए जसविंदर उर्फ जस्सा के एनकाउंटर के मामले में सीबीआई कोर्ट ने 17 सिपाहियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इनको डासना जेल भेज दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि यह इनकांउटर फर्जी था।

सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक एस. इस्लाम ने बताया कि 1992 में हुए जसविंदर उर्फ जस्सा एनकाउंटर की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने की थी। जांच में सीबीआई ने इस एनकाउंटर को पूरी तरह से फर्जी मानते हुए बिजनौर के बढ़ापुर थाने में तैनात 19 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बृहस्पतिवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश डा. एके सिंह ने सभी पुलिसकर्मियों को आईपीसी की धारा- 364, 302, 120बी और 218 का दोषी माना। कोर्ट ने बढ़ापुर थाने के तत्कालीन प्रभारी धीरेंद्र सिंह यादव समेत सभी 17 पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई। इस मामले में आरोपी दरोगा कृपाल सिंह और कांस्टेबल शीशपाल की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।

सीबीआई विशेष न्यायाधीश डा. एके सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ‘रक्षक द्वारा भक्षक की भूमिका निश्चित रूप से गंभीर अपराध है। हत्या करके मृतक को आतंकवादी घोषित करना और हत्या को मुठभेड़ दिखाना घोर अपराध है। इस प्रकार के अपराध से राष्ट्रीय एकता को क्षति पहुंचती है तथा आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक लड़ाई कमजोर पड़ जाती है। ऐसी आपराधिक गतिविधियों से पुलिस विभाग के चरित्र का हनन होता है। इस तरह से फर्जी पराक्रम का प्रदर्शन करने वालों की आपराधिक गतिविधियों से वास्तविक हकदारों को उनके अधिकारों से वंचित होना पड़ता है। जिसकों अदम्य साहस और पराक्रम का सम्मान व पदक मिलना चाहिए, वह उनको नहीं मिल पाता। मृतक जसविंदर उर्फ जस्सा का आतंकवादी होना, न होना अलग से विचारार्थ न्यायपटल पर नहीं है। फिर भी पुलिस को कानून अपने हाथ में लेकर दंड देने का, वह भी वध करने का अधिकार कदापि किसी प्रकार से न्यायोचित नहीं कहा जा सकता। पुलिस द्वारा यहां पर चूक हुई है, बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत ठंडे दिमाग से आपराधिक षड़यंत्र केतहत यह अपराध किया गया है।’

31 अक्तूबर 1992को बिजनौर की बढ़ापुर थाना पुलिस ने जसविंदर उर्फ जस्सा की थाना क्षेत्र के काशीवाला के जंगल में गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने इसे एनकाउंटर बताते हुए जस्सा को आतंकवादी दर्शाया था। उसके पास से एके-56 और एक दोनाली भी बरामद दिखाई थी। सीबीआई जांच में पता चला कि पुलिस दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारे से जस्सा को उठाकर लाई थी और बाद में उसे गोली मार दी। जस्सा वहां सेवादार था।

जैसे ही सीबीआई के विशेष न्यायाधीश डा. एके सिंह ने फर्जी एनकाउंटर के आरोपियों को ने दोषी करार दिया, वैसे ही कोर्ट में उपस्थित कई आरोपियों की आंखों से आंसू टपक पडे़। दोषी करार देने के साथ ही न्यायाधीश ने फैसला रिजर्व रख लिया और अंदर चले गए। जबकि आरोपी कोर्ट में ही जैसे जड़ हो गए। कोर्ट से बाहर आकर इनमें से कई पुलिसकर्मी फोन पर अपने परिजनों से बात करते नजर आए। नजारा कुछ ऐसा था कि दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मी खुद रो रहे थे और मोबाइल पर अपने परिजनों को दिलासा दे रहे थे। कुछ पुलिसकर्मी तो यह तक कहते सुने गए कि देश में शांति के लिए बब्बर खालसा गिरोह का आतंकवादी मारा था, पता नहीं था कि इसके लिए उन्हें जेल जाना पडे़गा।

दूसरी ओर एक साथ 17 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिए जाने की खबर जैसे ही गाजियाबाद पुलिस को मिली, वैसे ही कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। सेक्टर-3 चौकी के प्रभारी दीपक शुक्ला के नेतृत्व में पहुंचे भारी पुलिस बल ने कोर्ट के आदेश पर दोषी ठहराए गए सभी पुलिसकर्मियों का कस्टड़ी में ले लिया। दोपहर करीब साढे़ तीन बजे विशेष न्यायाधीश ने सभी दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इसके बाद पुलिस टीम सभी को कस्टडी में लेकर डासना जेल की ओर रवाना हो गई।

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English summary
Central Bureau of Investigation (CBI) court in Ghaziabad held 17 UP police personnel guilty of killing a 24-year-old man in a fake encounter in 1992 and sentenced them to life imprisonment. The police had picked up the victim, Jaswinder Singh alias Jassa, from Delhi, killed him in a fake encounter at the Kashiwala jungles in Bijnor district in Western UP on October 31, 1992, and later branded him as a terrorist.
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