ममता का लोकतंत्र पर हमला, पश्चिम बंगाल में अंग्रेजी अखबार बंद

इतना ही नहीं सर्कुलर में यह भी जारी किया गया है कि सिर्फ आठ अखबार ही सरकारी विभागों और लाइब्रेरी में आ सकते हैं जिनमें बांग्ला, ऊर्दू और हिंदी अखबार ही होंगे। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि ममता ने बंगाली के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार आनंद बाजार पत्रिका और जुगांतर को भी लिस्ट से बाहर कर दिया है।
सरकार की मानें तो अब पश्चिम बंगाल के सरकारी विभागों या लाइब्रेरी में अंग्रेजी के अखबार दिखाई नहीं देंगे। इसमें द टेलिग्राफ, द टाइम्स आफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स सहित वे सारे अखबार शामिल हैं जो अंग्रेजी में प्रकाशित होते हैं। इन सभी अखबारों को लगभग सरकारी विभागों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। सरकार का इस सर्कुलर के पीछे जो तर्क है वो यह है कि अखबारों की भाषा से लोगों की भाषा बनती बिगडती है, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि सरकारी विभागों में सिर्फ मातृ भाषाओं के अखबार ही मगाये जाएंगे।












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