ममता का लोकतंत्र पर हमला, पश्चिम बंगाल में अंग्रेजी अखबार बंद

Chief Minister of West Bengal Mamata Banerjee
कोलकाता। इसे ममता बनर्जी का प्रदेश हित के लिये कठोर निर्णय कहें या फिर फरमान मगर जो कुछ भी है पश्चिम बंगाल के लोगों ने इसका स्‍वागत किया है। ममता ने पश्चिम बंगाल में अंग्रेजी अखबारों को सरकारी सूची से बाहर कर दिया है। खास बात यह है कि इसी प्रदेश में देश का पहला अंग्रेजी अखबार प्रकाशित हुआ था। मामता बनर्जी ने एक सर्कुलर जारी किया है कि जिसके अनुसार अब पश्चिम बंगाल सरकार के किसी भी विभाग या लाइब्रेरी में अंग्रेजी के अखबारों की सप्‍लाई नहीं ली जायेगी।

इतना ही नहीं सर्कुलर में यह भी जारी किया गया है कि सिर्फ आठ अखबार ही सरकारी विभागों और लाइब्रेरी में आ सकते हैं जिनमें बांग्‍ला, ऊर्दू और हिंदी अखबार ही होंगे। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि ममता ने बंगाली के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबार आनंद बाजार पत्रिका और जुगांतर को भी लिस्ट से बाहर कर दिया है।

सरकार की मानें तो अब पश्चिम बंगाल के सरकारी विभागों या लाइब्रेरी में अंग्रेजी के अखबार दिखाई नहीं देंगे। इसमें द टेलिग्राफ, द टाइम्स आफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स सहित वे सारे अखबार शामिल हैं जो अंग्रेजी में प्रकाशित होते हैं। इन सभी अखबारों को लगभग सरकारी विभागों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। सरकार का इस सर्कुलर के पीछे जो तर्क है वो यह है कि अखबारों की भाषा से लोगों की भाषा बनती बिगडती है, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि सरकारी विभागों में सिर्फ मातृ भाषाओं के अखबार ही मगाये जाएंगे।

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