28 रुपये वाले नहीं माने जाएंगे गरीब, फिर तय होंगे मानक

इसी सियासी गरमाहट के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को पद्म पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर कहा कि पहले गरीबी का आकलन दैनिक कैलोरी खपत के आधार पर किया जाता रहा है। यह तरीका लगभग 30 साल तक चला। अब गरीबी का आकलन करने के लिए हमें बहुस्तरीय प्रयास करने होंगे। नया तरीका निकालने को हमने एक नया समूह बनाया है।
उधर, योजना राज्यमंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि सरकार ने गरीबी रेखा तय करने की प्रणाली की समीक्षा के लिए तीन महीने में तकनीकी समूह गठित करने का फैसला किया है। यह समूह ऐसी प्रणाली बनाने के लिए सुझाव देगा जो मौजूदा वास्तविकताओं के हिसाब से गरीबी का आकलन कर सके। उन्होंने कहा, तकनीकी समूह को 2011 के सामाजिक आर्थिक आंकड़ों तथा जाति आर्थिक जनगणना आंकड़ों का लाभ मिलेगा। इससे सरकार देश में गरीबी के आंकड़ों की उद्देश्यपूर्ण समीक्षा कर सकेगी। कुमार ने बताया कि समूह के गठन के लिए सरकार ने दिसंबर 2011 में फैसला किया था।
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार गरीबी रेखा के नए आंकड़ों को छोड़ रही है, अश्विनी कुमार ने कहा, मेरा मानना है कि गरीबी के आकलन के तरीके पर नए सिरे से विचार किया जाना चाहिए। योजना आयोग के अनुमानों के अनुसार 2009-10 में गरीबी अनुपात 29.8 प्रतिशत रहा था जो 2004-05 में 37.2 प्रतिशत था। यह आकलन शहर में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति खपत 28.65 रुपये तथा ग्रामीण इलाकों में 22.42 रु प्रति दिन के हिसाब से किया गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह ने बुधवार को लोकसभा में गरीबी रेखा के ताजा आंकड़ों पर नाराजगी जताते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष को हटाने की मांग थी।












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