बेलगाम नेता और बेबस चुनाव आयोग

गुस्से में आकर मर्यादा लांघने के आरोप में राहुल गांधी पर यूपी के कानपुर में मामला दर्ज हुआ है। यहां सवाल ये है कि लगातार कांग्रेस के नेता चुनाव आयोग के लिए चुनौती क्यों साबित हो रहे हैं, और इसके बावजूद आयोग की तरफ से इन आरोपों की जांच के बाद कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है? वैसे आचार संहिता को ठेंगा दिखाने वाले तो सभी दल में हैं मगर कांग्रेस के नेता चुनौती देकर आयोग की अवहेलना कर रहे हैं। मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नेता बेलगाम और आयोग बेबस क्यों नजर आ रहा है?
आगे की बात करने से पहले आपको बताते चलें कि सोमवार को कानपुर में राहुल का रोड शो था। अब इसे सत्ता का नशा कहें या सत्ता में आने का जुनून मगर कांग्रेस के युवराज ने सोमवार को चुनौती देकर आचार संहिता का उल्लंघन किया। राहुल गांधी को 12 बजे तक और सिर्फ 20 किमी तक रोड शो की अनुमति मिली थी मगर राहुल गांधी ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए अपने मन का किया और जहां जाना चाहे वहां गये। खैर इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है मगर जो बात सामने आई है वह यह है कि आखिर नेता कि हिम्मत कैसे होती है कि वह चुनौती देकर आयोग की मर्यादा को लांघे।
तो आईए फिर आपको कुछ बेलगाम नेताओं के बारे में बताते हैं जिन्होंने ताल ठोक कर आयोग के नियमों को ताख पर रख दिया और चुनौती देकर कानून का उल्लंघन करते रहे।
बेलगाम नेता नंबर 1
आपको सुनकर हैरत होगी कि कानून का नियमों की धज्जियां उडाने वाले बेलगाम नेता नंबर वन कोई और नहीं बल्कि देश के कानून मंत्री ही हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं कानून मंत्री सलमान खुर्शीद की। आपको बताते चलें कि कुछ दिन पूर्व ही अल्पसंख्यक वोटों को आपनी तरफ खिंचने के लिये सलमान खुर्शीद ने आचार संहिता को ठेंगा दिखा दिया। आयोग को चुनौती देते हुए खुर्शीद ने अपनी पत्नी और उत्तर प्रदेश के फरूखाबाद विधानसभा चुनाव क्षेत्र से उम्मीदवार लुइस के लिए चुनाव प्रचार करते हुए पिछले महीने वादा कर दिया कि उनकी पार्टी 27 प्रतिशत के अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण में से नौ प्रतिशत अल्पसंख्यकों के लिए उप कोटा बढ़ा कर नौ प्रतिशत कर देगी। बाद में खुर्शीद ने आयोग से माफी मांग ली और मामना शांत हो गया।
बेलगाम नेता नंबर 2
सलमान खुर्शीद के मामले के बाद केन्द्रिय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने आचार संहिता का उल्लंघन कर दिया। उन्होंने ने भी अल्पसंख्यक मामले पर जमकर बोला। वर्मा जब आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे थे उस समय मंच पर कानून मंत्री सलमान खुर्शीद भी मौजूद थे। फ़र्रूखाबाद में चुनाव प्रचार करते हुए वर्मा ने वादा कर दिया कि अगर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सत्ता में आई तो मुसलमानों को नौ फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। इस मामले में आयोग ने नोटिस दिया और जबाब मांगा। वहीं आयोग ने खुद यह कहा है कि बर्मा ने 'जानबूझकर एवं दुर्भावनापूर्ण' तरीके से मुस्लिमों के लिए आरक्षण से सम्बंधित बयान दिया था।
बेलगाम नेता नंबर 3
इसके बाद जिस नेता का नाम आता है वह ऐसे नेता है जो हर समय कानून और नियम की बात करते रहते हैं। वह अपने हर भाषण में यूपी की खराब लॉ एंड आर्डर की बात करते रहते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी की। सोमवार को राहुल गांधी ने कानपुर में जो कुछ भी किया वह बेहद अजीबो गरीब था। मीडिया ने राहुल के रोड शो की जो तस्वीर सामने लाईं वह आयोग को मुंह चिढ़ाने जैसा था। प्रशासन राहुल से कहता रह गया कि पूरे शहर को अपने रोड शो का बंधक ना बनाओ, तय रास्ते से अपना जुलूस निकालो मगर राहुल ने प्रशासन की एक ना सुनी और कानून को ताख पर रखते हुए अपने मन का ही किया।
आयोग ने शिकायत के बाद कानपुर के कैंट थाने में राहुल खिलाफ मुकदमा दर्ज किया तो कोयला मंत्री राम प्रसाद जयसवाल ने कहा कि आयोग की अगर हिम्मत हो तो वह मुझपर मुकदतमा दर्ज करके दिखा दे। आपको बताते चलें कि राहुल गांधी को कानुपर के सर्किट हाउस से मालरोड होते हुए वीआईपी रोड से निकलने की अनुमति थी मगर राहुल ने अपना र्रोड शो शहर के रॉकेट चौराहे से शुरु किया। नतीजतन शिवरात्री के चलते पूरा शहर भयंकर जाम की गिरफ्त में आ गया।
बेलगाम नेता नंबर 4
मतदान के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज म्रिश्र ने जानबुझकर चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन किया। मतदान केंद्र पर मतदान के दौरान चुनाव आयोग के मना करने के बाद भी प्रचार जारी रखा। कलराज मिश्र को चुनाव आयोग ने साफ नोटिस दिया कि वह मतदान के दौरान मतदान केंद्र पर प्रचार ना करें मगर कलराज मिश्र ने आयोग के इस बात को हवा में उड़ा दिया। खैर कलराज मिश्र ऐसा करने वाले पहले नेता नहीं हैं, इससे पूर्व भी बीआईपी और बड़े नेता मतदान केंद्र के अंदर आसानी से घुमते हैं और आयोग के नियमों का उल्लंघन करते हैं।
बेलगाम नेताओं के आगे बेबस चुनाव आयोग
संविधान ने तो वैसे चुनाव आयोग के तरकस में कई ऐसे तीर और बाण दे रखे हैं मगर आयोग का पसंदीदा अस्त्र हैं नोटिस अस्त्र। जो चलते ही शोर तो बहुत करता है मगर निशाने तक पहुंचते पहुंचते फुस हो जाता है। सवाल यह उठता है कि अखिर चुनाव आयोग नियमों की बखिया उधेड़ने वाले नेताओं पर ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं करता जो भविष्य में एक मिशाल बन जाये और ऐसा करने से पहले नेताओं को सौ बार सोचना पड़े। इस संबंध में आपकी कया प्रतिक्रिया है हमें जरुर बताईए। आप अपनी प्रतिक्रिया हम तक पहुंचाने के लिये नीचे दिये गये कमेंट बाक्स में लिख सकते हैं। आपकी बहुमुल्य प्रतिक्रिया का हमें इंतजार रहेगा।












Click it and Unblock the Notifications