दिल्ली वाले कमाने और पैसा फूंकने में सबसे आगे

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दिल्ली (ब्यूरो)। दिल्ली में लोगों का सबसे ज्यादा खर्च दूध पर है। एक आदमी महीने 1014 रुपये खर्च करता है, इसमें दूध पर वह 277 रुपये खर्च करता है। जबकि 198 रुपये बाहर (चाट पकोड़ी और कोल्ड ड्रिंक) खर्च करता है। वैसे पैसे कमाने और खर्च करके के मामले में दिल्ली में देश सबसे आगे है। अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की तरफ से तैयार दिल्ली के परिवारों के उपभोक्ता व्यय की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

दिल्ली में प्रतिव्यक्ति आय 1,16,886 रुपये है, जबकि शहरी क्षेत्र में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति का खर्च 2905 रुपये है। यह देश में सबसे अधिक है। यह 2008 में 2078 रुपये था। राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति खर्च 1984 रुपये है। खर्च करने के मामले में दूसरे नंबर पर हिमाचल प्रदेश, तीसरे पर महाराष्ट्र, चौथे पर केरल और पांचवें पर आंध्र प्रदेश है। यहां चौसठ फीसदी परिवारों के पास अपना मकान है। इतना ही नहीं, दिल्ली के 15.31 फीसदी घर (5.61 लाख परिवार) सीधे तौर पर इंटरनेट से जुड़े हैं।

अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की तरफ से तैयार दिल्ली के परिवारों के उपभोक्ता व्यय की रिपोर्ट में यह हकीकत सामने आई है। रिपोर्ट मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने जारी की है। यह जुलाई, 2009 से जून, 2010 के दौरान राष्ट्रीय प्रतिदर्शी सर्वेक्षण के दौरान कराए गए नमूना सर्वेक्षण पर आधारित है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा है कि आंकड़े दिल्ली की आर्थिक खुशहाली और व्यय की प्राथमिकता के संकेत दिखा रहे हैं।

रिपोर्ट में स्पष्ट है कि दिलवालों के इस शहर में 51 फीसदी परिवारों का खर्च 2501 रुपये से अधिक है। जबकि औसत खर्च 1,014 रुपये बैठता है। शहरी क्षेत्र में 10 फीसदी रकम दूध और 36 फीसदी खानपान की वस्तुओं पर खर्च होती है। नौ फीसदी खर्च शिक्षा और सात फीसदी यात्रा किराए पर लोग खर्च करते हैं। राष्ट्रीय स्तर की बात करें तो खानपान वस्तुओं पर 39 फीसदी पैसा खर्च होता है।

दिल्ली के नब्बे फीसदी परिवार खाना बनाने के लिए गैस का इस्तेमाल करते हैं। यहां प्रत्येक परिवार में व्यक्तियों की औसत संख्या 4.5 है। बच्चों की संख्या 1.17 है। दिल्ली में लोग नौकरी के बजाय अपना कारोबार अधिक पसंद करते हैं। यहां 40 फीसदी लोग अपना कारोबार करते हैं, जबकि 49 फीसदी लोग नियमित वेतन या मजदूरी पर आधारित हैं। दिल्ली के परिवारों में महिलाओं को प्रमुखता मिलनी शुरू हो गई है। रिपोर्ट से पता चलता है कि सात फीसदी घरों की मुखिया महिलाएं हैं।

दिल्ली में महिलाओं की जनसंख्या में 50 प्रतिशत विवाहित हैं। इनमें छह प्रतिशत विधवा, 0.18 फीसदी तलाकशुदा या पति से अलग रहने वाली हैं। दिल्ली सरकार की ताजा रिपोर्ट बताती है कि यहां लोग अनाज की बजाय जंक फूड व फास्ट फूड की तरफ झुके हैं। यहां प्रतिव्यक्ति मासिक अनाज की खपत 8.23 किलोग्राम है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह खपत 9.39 किलोग्राम है। शहरी दिल्ली में प्रति व्यक्ति चावल की खपत सिर्फ 1.45 किलोग्राम है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 4.66 किलोग्राम है। हालांकि गेहूं खपत के मामले में दिल्ली बहुत आगे है। यहां प्रति व्यक्ति मासिक गेहूं खपत 6.76 किलोग्राम है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर सिर्फ 4.36 किलोग्राम है।

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