यूपी के दूसरे चरण में किसका होगा वर्चस्‍व

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उत्‍तर प्रदेश के पहले चरण में 62 प्रतिशत मतदान के बाद सभी राजनीतिक पार्टियों की नजरें अब दूसरे चरण पर टिकी हुई हैं। उम्‍मीद से अधिक वोट पड़ने से यह साफ हो गया है कि उत्‍तर प्रदेश में बदलाव की लहर चल पड़ी है। हालांकि पहले चरण में तो बारिश की वजह से तमाम मतदाता बाहर नहीं निकल सके, इसलिए सही आंकलन लगाना ठीक नहीं होगा।

आज मौसम साफ है और शाम तक जितना प्रतिशत वोट गिरेगा उसी से यूपी का आगे का आधार तय होगा। दूसरे चरण की बात आ ही गई है, तो सबसे पहले हम बता दें कि पूर्वांचल की इन 59 सीटों में सबसे ज्‍यादा उम्‍मीदें भाजपा को हैं, क्‍योंकि यह भाजपा का गढ़ रहा है। इस साल अगर समीकरण बदले तो बसपा और सपा को यहां फायदा मिल सकता है।

इतिहास के पन्‍ने पलटें तो इलाकों में हमेशा से काफी कम मतदान होता रहा है। बहुत कम सीटों पर ही 60 प्रतिशत से ज्‍यादा मतदान हुआ है। इस साल समीकरण बदलने के पूरे आसार हैं, क्‍योंकि पहली बार वोट देने जा रहे लोगों की संख्‍या काफी बढ़ गई है। समीकरण बदलने से पहले हम यहां प्रस्‍तुत कर रहे हैं सभी सीटों का आंकलन-

312. मेधावल- यहां 56 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट कभी नहीं पड़े। दो बार यह सीट सपा के खाते में गई। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा प्रत्‍याशी जीता, यानी इस साल यह सीट भाजपा के खाते में जा सकती है।

313. खलीलाबाद- यहां 54 प्रतिशत से ज्‍यादा मतदान कभी नहीं हुआ। यहां पर 2009 के बाद से बसपा का राज है।

314. धनघटा (अनुसूचित जाति)- 2009 में यह नई सीट बसपा के खाते में गई थी। इस साल कहां जायेगी पता नहीं।

315. फरेंदा- यहां कभी भी 50 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट नहीं पड़े। कांग्रेस और सीपीएम का बोलबाला रहा है। 2009 में कांग्रेस काफी कम मतों से जीती थी।

316. नौतनवा - यह नई सीट है और कांग्रेस का वर्चस्‍व दिखाई देता है। 2009 के लोकसभा चुनाव में इस पर कांग्रेस आगे रही थी।

317. सिसवा - यहां 60 प्रतिशत तक मतदान देखा जा चुका है। इस सीट पर भाजपा और बसपा का आदान-प्रदान होता रहा है। हालांकि इस समय भाजपा काफी मजबूत है। 2009 में यहां कांग्रेस को बढ़त मिली थी।

318. महाराजगंज (अनुसूचित जाति) - यहां 60 प्रतिशत तक मतदान देखा जा चुका है। यह भाजपा का गढ़ माना जाता है, हालांकि 2009 में कांग्रेस ने यहां बढ़त हासिल की थी।

319. पनियरा- यहां 50 से 60 फीसदी मतदान होता रहा है। भाजपा और कांग्रेस इस सीट पर बारी-बारी से आती रही हैं। भाजपा का प्रभुत्‍व अधिक दिखाई देता है।

320. कैपियारगंज- नई सीट है, जहां भाजपा ने 2009 में काफी बड़े अंतर से बढ़त हासिल की थी। यह सीट गोरखपुर संसदीय सीट के अंतर्गत आती है, जहां योगी अदित्‍यनाथ का वर्चस्‍व है।

321. पिराइच - 1993 और 1996 में यहां 60 प्रतिशत तक वोट पड़े थे। यहां स्‍वतंत्र प्रत्‍याशी पप्‍पू भईया का बोलबाला रहा है। हालांकि 2009 में भाजपा को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिले थे।

322. गोरखपुर शहर- इस सीट पर पिछले कई सालों से भाजपा जीतती आयी है। 2009 में भी काफी अच्‍छी संख्‍या में वोट मिले थे।

323. गोरखपुर ग्रामीण- यहां कभी भी 47 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट नहीं पड़े। 2009 में भाजपा को बढ़त मिली थी।

324. सहजनवा- यहां आज तक 55 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट नहीं पड़े। यहां भाजपा, सपा और बसपा के प्रत्‍याशी जीतते आये हैं।

325. खजनी (अनुसूचित जाति) - इस सीट पर 2009 में बसपा को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिले थे।

326. चौरी-चौरा- इस नई सीट के संसदीय क्षेत्र में भाजपा ने 2009 में अच्‍छा प्रदर्शन किया था, लेकिन तब वोटिंग मात्र 39 प्रतिशत हुई थी।

327. बंसगांव (अनुसूचित) - यहां कभी भी 49 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट नहीं पड़े। यहां भाजपा और बसपा के बीच जंग होती रही है।

328. चिल्‍लूपार- यहां 55 प्रतिशत तक वोटिंग देखी जा चुकी है। यह कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। 2009 में भाजपा ने यहां से अच्‍छी संख्‍या में वोट हासिल किये थे।

329. खड्डा- यह सीट नई है, हालांकि इलाके में कांग्रेस का वर्चस्‍व है।

330. पडरौना- यहां 62 प्रतिशत तक वोट देखे जा चुके हैं। यह सपा का गढ़ है। 2009 के में बसपा को बढ़त मिली थी।

331. तमकुही राज- इस सीट पर बसपा के जीतने की उम्‍मीद है, 2009 में भी बसपा को भारी संख्‍या में मत मिले थे।

332. फाजिलनगर- यहां पर 50 से 60 प्रतिशत तक वोटिंग होती रही है। जनता दल की यह सीट बाद में भाजपा के पास चली गई। लेकिन इस साल बसपा मजबूत दिखाई दे रही है।

333. कुशीनगर - इस सीट पर 2009 में कांग्रेस ने काफी कम अंतर से बढ़त हासिल की थी। हालांकि तब 50 प्रतिशत वोट पड़े थे।

334. हाता- यहां पर सबसे ज्‍यादा 59 प्रतिशत तक वोट पड़ चुके हैं। जनता दल का वर्चस्‍व रहा है, लेकिन 50 के दशक में भाजपा और कांग्रेस काफी दमदार दिखाई देते रहे हैं।

335. रामकोला (अनुसूचित जाति) - 1996 में यहां 60 प्रतिशत मतदान हुआ था। यहां समाजवादी पार्टी काफी मजबूत है। हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिले थे।

336. रुद्रपुर - यहां कभी भी 53 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट नहीं पड़े। सपा और भाजपा के खाते में यह सीट बारी-बारी से जाती रही है।

337. देवरिया- यहां 53 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट कभी नहीं पड़े। पहले यहां भाजपा का कब्‍जा हुआ करता था, लेकिन अब अन्‍य दल यहां पैर फैला रहे हैं।

338. पथरदेवा- इस सीट पर भाजपा का वर्चस्‍व कम होता दिख रहा है।

339. रामपुर कारखाना- इस सीट में बसपा ने 2009 के चुनाव में अच्‍छा प्रदर्शन किया था।

340. भाटपुर रानी- यहां पर पहले कांग्रेस का दमखम चलता था लेकिन आज समाजवादी पार्टी काफी आगे है। हालांकि कांग्रेस ने 2009 में यहां से काफी वोट प्राप्‍त किये थे।

341. सलेमपुर (अनुसूचित जाति)- यहां पर कभी भी 49 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट नहीं पड़े। बसपा और कांग्रेस में यहां बड़ी लड़ाई है।

342. बरहज- इस क्षेत्र में भाजपा के आगे आने की पूरी उम्‍मीद दिखाई दे रही है।

343. अतरौली- इस सीट पर बसपा और सपा के बीच हमेशा कड़ा युद्द होता है। 2009 के चुनाव में इस क्षेत्र से बसपा कुछ 100 वोटों से ही आगे रही थी।

344. गोपालपुर यहां 51 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट कभी नहीं मिली है। भाजपा ने 2009 में यहां से अच्‍छी संख्‍या में मत हासिल किये थे।

345. सगरी- यहां पर बसपा का वर्चस्‍व काफी सालों से है। हालांकि भाजपा ने 2009 के चुनाव में काफी मत हासिल किये थे।

346. मुबारकपुर- यहां अभी तक बसपा का दबदबा रहा है। 2009 में भी बसपा को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिले थे।

347. आजमगढ़- यहां पर अब तक सबसे ज्‍यादा 54 प्रतिशत वोट ही पड़े हैं। यह सपा का गढ़ माना जाता है, लेकिन भाजपा को 2009 में यहां से अच्‍छे वोट मिले थे।

348. निजामाबाद- यहां पर 51 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट नहीं पड़े हैं। 2009 के चुनाव में बसपा को अच्‍छी संख्‍या में मत हासिल हुए थे।

349. फूलपुर-पवई - यहां पर 2009 में बसपा को बढ़त मिली थी। लिहाजा इस साल अगर बसपा का काम अच्‍छा रहा होगा, तो उनकी जीत हो सकती है।

350. दीदरगंज- इस सीट पर भी बसपा काफी आगे रही है।

351. लालगंज (अनुसूचित जाति) - यह सीट भाजपा और बसपा के खेमें में हिचकोले खाती रही है। हालांकि 2009 में बसपा को यहां से अच्‍छी बढ़त हासिल हुई थी।

352. मेहनगर (अनुसूचित जाति) - यहां कभी भी 52 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट नहीं पड़े। यहां कई दलों के विधायक राज कर चुके हैं।

353. मधुबन - इस सीट पर 2009 में बसपा को बढ़त मिली थी, अब देखना यह है कि उस बढ़त को भाजपा जीत में बदल पाती है या नहीं।

354. घोसी - यहां पर 50 से 60 प्रतिशत के बीच में ही मतदान होता रहा है। बसपा ने यहां 2009 में काफी बड़े अंतर से मत हासिल किये थे।

355. मुहम्‍मदाबाद - गोहना (अनुसूचित जाति)- यहां पर भी 50 प्रतिशत के आस-पास ही वोट रहा है। बसपा को यहां अच्‍छे वोट मिलने की संभावना है।

356. मऊ- यह मुख्‍तार अंसारी का इलाका माना जाता है। यहां पर इनके अलावा बाकी के प्रत्‍याशी काफी पीछे रहते हैं।

357. बेलतारा रोड (अनुसूचित जाति) - यहां पर बसपा को 2009 में काफी फायदा पहुंचा था।

358. रासरा - यहां पर 40 प्रतिशत के आस-पास वोटिंग रही है। यह सीट बसपा और भाजपा के खाते में जाती रही है। 2009 में बसपा को बढ़त मिली थी।

359. सिकंदरपुर- यहां पर 50 प्रतिशत के आस-पास वोटिंग रहती है। बसपा 2009 में काफी आगे रही थी।

360. फेफाना - यह सीट 2009 में समाजवादी पार्टी के खाते में गई। वहां उस दौरान 40 प्रतिशत वोट पड़े थे।

361. बलियानगर - इस सीट को सपा का गढ़ माना जाता है। यहां पिछले कई वर्षों से सपा का ही कब्‍जा रहा है।

362. बंसदीह - यहां पर 40 प्रतिशत के आस-पास मतदान होता रहा है। 2009 में बसपा ने काफी अच्‍छा प्रदर्शन किया ।

363. बैरिया - यहां पर सपा का बोलबाला रहता है।

373. जखनियान (अनुसूचित जाति) - यहां पर बसपा की सीट थी, जो बाद में सपा के खाते में चली गई। हालांकि 2009 में सपा ने काफी अच्‍छी बढ़त हासिल की थी।

374. सैदपुर (अनुसूचित जाति) - यह सीट बसपा के खेमे से निकलकर भाजपा के पास और फिर सपा के पास। 2009 में तो सपा को भारी बढ़त हासिल हुई थी।

375. गाजीपुर - यहां पर यहां पर सीपीआई और भाजपा की लड़ाई थी, जो बाद में बसपा की जीत के साथ खत्‍म हो गई। 2009 में सपा ने यहां से काफी अच्‍छी संख्‍या में वोट हासिल किये।

376. जंगीपुर - यह सीट गाजीपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत आतीहै, जहां सपा का दबदबा रहता है।

377. जहूराबाद - यहां पर 1995 में 60 फीसदी तक मतदान पहुंच गया था। यह सीट बसपा और भाजपा के पास बारी-बारी से रही है।

378. मोहम्‍मदाबाद - यहां अफजल अंसारी का दबदबा रहा है, जेकिन बाद में यह सीट भाजपा के पास चली गई। तीन बार कांटे की टक्‍कर हुई और फिर 2009 में बसपा को सबसे ज्‍यादा बढ़त मिली।

379. जमनिया- यहां पर समाजवादी पार्टी ने काफी करीब से बढ़त हासिल की थी।

यह लेख ब्‍लॉग ऑफस्‍टम्‍प्‍ड से अनुवादित है।

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