यूपी चुनाव में जीत के लिए नगों का टोटका

प्रत्याशी स्थानीय स्तर से लेकर हरिद्वार, लखनऊ, दिल्ली, अयोध्या, मथुरा व काशी के धार्मिक गुरुओं के पास चक्कर लगा रहे हैं। नब्बे फीसदी नेताओं के भाग्य ग्रह नक्षत्र के तराजू में तोले जा चुके हैं। इनका भाग्य कमजोर है उन्हें मजबूत करने और जिनका मजबूत है उन्हें और भी मजबूत करने की सलाह मिल रही है। ज्योतिषाचार्य डा.चंद्र प्रकाश का कहना है कि इस बार छह बातों पर एक साथ विचार कर रहे हैं। ग्रह का दोष कैसे खत्म होगा? कौन सी तारीख यानी अंक शुभ रहेगा? दिन कौन सा साथ देगा, रंग जो जीत दिलाए। मजार जहां की दुआ कमजोर भाग्य की दवा बने और वह धर्मस्थल जो वर्तमान स्थल को विजयी भूमि बना दे।
उनकी मानें तो इस बार नए वर्ष के प्रथम मास से चुनाव का आगाज हो रहा है और मकर संक्रांति के बाद ही वह अंजाम पर पहुंच रहा है इसलिए सभी की राशि में ग्रहों की चाल में काफी हद तक पिछली बार की अपेक्षा बदलाव तय है। लिहाजा वक्त के बदलाव के हिसाब से अनुकूल परिणाम के लिए कई तरह के टोटके बताए व अपनाए जा रहे हैं। ज्योतिषाचार्य विकास खुराना ने बताया कि चुनावी समर में तेजी के साथ मनमुताबिक रिजल्ट के लिए उम्मीदवार व उनके परिजन सलाह लेने आ रहे हैं। प्रतिकूल ग्रहों को अनुकूल करने में नग या उपासना सहायक होती है। व्यक्ति की कुंडली देखकर उसके मुताबिक उपचार बताया जा रहा है।
इसके तहत घर के दरवाजे पर ग्रहशोधक पौधा लगाने, खास नग या पत्थर पहनने, खास रंग का इस्तेमाल बढ़ाने, अंक के हिसाब से कार्यक्रम तय करने और धार्मिक स्थलों की यात्रा तथा यज्ञ करने जैसे तरीके ज्यादा अपनाए जा रहे हैं। राशि के आधार पर इस बार स्टोन, रंग, अंक व दिन की महत्ता बदली है, जो अधिकांश प्रत्याशी स्वीकार करते हुए चुनावी मुहिम में कदम बढ़ा रहे हैं।












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