कांग्रेस कार्यसमिति में जगह मिली मसूद को

राजनीतिक आधार मजबूत करने में जुटी कांग्रेस ने सपा से छिटके राशिद मसूद को कांग्रेस कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य बना दिया है। मसूद हालांकि कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे जो कि खास मौकों पर ही कार्यसमिति की बैठकों में ही शामिल होते हैं। लेकिन मसूद को पार्टी की शीर्ष इकाई में जगह देकर कांग्रेस ने वेस्ट यूपी में संगठन में कद्दावर मुसलिम नेता के सूखे को कम करने की कोशिश की है।
अल्पसंख्यकों को साढ़े चार फीसदी आरक्षण देकर कांग्रेस पहले ही बसपा और सपा के मुसलिम वोट बैंक पर सेंध लगाने का दांव खेल चुकी है और उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने के बाद पार्टी प्रदेश में इससे ज्यादा का आरक्षण देने का दावा भी कर रही है। साथ ही अति पिछड़े मुसलिम वर्ग के ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवारों को टिकट देकर भी पार्टी ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों को साधने के लिए जहां उसने रालोद से सियासी गठबंधन सिरे चढ़ाया है तो दूसरी ओर मसूद को अपने पाले में लाकर क्षेत्र के मुसलिम वोटों पर भी दांव खेला है। राशिद मसूद को पहले अल्पसंख्यक आयोग में पद देने की बात चल रही थी, लेकिन उनके कद के मुताबिक कोई पद खाली नहीं होने के कारण उन्हें फिलहाल कांग्रेस कार्यसमिति में शामिल किया है।
सलमान खुर्शीद और राशिद अल्वी जैसे नेता भी पार्टी के बड़े मुसलिम नेता माने जाते हैं, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश से नहीं होने के चलते इस क्षेत्र में अभी तक बड़े मुसलिम नेता की कमी पार्टी को खलती रही है।
मुसलिम वोटों पर रालोद की भी नजर
पूर्व बसपा विधायक हाजी याकूब कुरैशी के रालोद में शामिल हो गए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में सत्ता में आने पर मुसलिमों के लिए सरकारी नौकरियों में 8 प्रतिशत आरक्षण दी जाएगी। मायावती सरकार में मंत्री रह चुके कुरैशी ने अपने समर्थकों के साथ पार्टी ज्वाइन की। कुरैशी को पार्टी में शामिल कर अजित सिंह ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद को मजबूत करने की कोशिश की है।
कुरैशी ने कहा कि बसपा की जनविरोधी नीति के चलते वह रालोद में आए हैं। सूत्रों का कहना है कि भविष्य में दूसरे दलों से कई और असंतुष्ट बड़े नेता रालोद में आ सकते हैं। साल 2006 में मुलायम सिंह की सरकार में मंत्री रहते हुए कुरैशी ने कथित रूप से पैगंबर मोहम्मद का कैरीकैचर बनाने वाले डेनमार्क के एक कार्टूनिस्ट के सिर पर 51 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था।
यह पूछे जाने पर कि क्या केवल मुसलिमों और अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए गठबंधन किया गया है, अजित ने कहा कि हमारी नजरें समाज के सभी वर्गों पर है, जिनसे हमें मौजूदा सरकार को उखाड़ फेंकने में मदद मिलेगी। इसमें अल्पसंख्यकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।












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