राजस्‍थान: गम और कलंक का निशान छोड गया बीता साल

Last year was very bad for Rajasthan
जयपुर। राजस्थान के लिए बीता साल सामरिक दृष्टि से राज्य के विकास के संदर्भ में जहां अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा वहीं राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र में हलचलें तेज रहीं। नर्स भंवरी देवी के रहस्यमय तरीके से लापता होने, गोपालगढ़ की साम्प्रदायिक हिंसा, सर्वाइ माधोपुर में थानाधिकारी को जिंदा जला देने, दारा सिंह फर्जी मुठभेड़ में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की संलिप्तता और एक पूर्व मंत्री के शक के दायरे में आने से, शान्त समझे जाने वाले राजस्थान की छवि प्रभावित र्हुइ वहीं दूसरी ओर कृष्णा पूनिया ने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीत कर प्रदेश को गौरवान्वित किया।

बीते वर्ष में जयपुर के पूर्व महाराजा भवानी सिंह, राजस्थान मूल के गजल सम्राट जगजीत सिंह का निधन प्रदेशवासियों को शोक में डुबो गया। बीते साल सामरिक दृष्टि से थलसेना और वायुसेना के संयुक्त युद्धाभ्यास और थल सेना के युद्धाभ्यास सुदर्शन के जरिये भारत ने अपनी सशक्त सामरिक शक्ति का प्रदर्शन किया। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल पर हुआ डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल लाइन का शिलान्यास राजस्थान के विकास का एक नया इतिहास लिख गया।

विदा हुए बीते साल में राजनीतिक तौर पर राष्‍ट्रपति को लेकर की र्गइ कथित टिप्पणी को लेकर वक्फ मंत्री अमीन खां का मंत्री पद खोना और पार्टी लाइन के निर्देश का पालन करने के कारण मंत्री पद पर वापसी, भारतीय जनता पार्टी की आपसी कलह के बीच वसुंधरा राजे की नेता प्रतिपक्ष पर पुन:नियुक्ति और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद पर डॉ चन्द्रभान की ताजपोशी ने कइयों के अरमानों पर पानी फेर दिया।

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