हरियाणा के किसान ने बनाया एंटीऑक्सीडेंट बिस्कुट

मंडियों में खरीदार को तरसते बाजरे को अब नया बाजार मिलेगा। उसके इस कमाल से प्रभावित नेशनल इनोवेशन फंड ने तो इस बिस्कुट की मार्केटिंग करने की बात भी कह डाली है। हरियाणा किसान आयोग ने भी इसके लिए मदद देने का आश्वासन दिया है। झज्जर जिले में भिंडावास झील पर बसा खूबसूरत कनवा गांव के अंडर मैट्रिक वेदपाल के पास आजीविका के लिए न तो विरासत में मिली दौलत थी और न ही रोजगार था। एक दिन किसी ने उसे बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र में हर्बल एंड कास्मेटिक प्रोडक्ट बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है।
यह जानकारी मिलने पर उसके कदम बढ़ गए केंद्र की ओर। ट्रेनिंग लेने के बाद वेदपाल ने सोचा कि बाजरे की रोटी इतनी स्वादिष्ट है तो क्यों न इसके बिस्कुट बनाए जाएं। उसकी इस सोच को कृषि विज्ञान केंद्र ने आधार दिया और फिर वहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर वह बिस्कुट बनाने में जुट गया। उसने महज एक हजार रुपये से बिस्कुट बनाने की शुरुआत की। ये बिस्कुट इतने स्वादिष्ट व पौष्टिक बने कि जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ने इसे कुरुक्षेत्र में आयोजित सरस मेले में ले जाने का फैसला लिया। वेदपाल कहता है कि कुरुक्षेत्र में तो बीस-पच्चीस लोगों ने ऑर्डर दे दिए। वहां से उत्साह समेटकर वह किसान जनित नव प्रवर्तन राष्ट्रीय कार्यशाला में आया है।
यहां चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में प्रदर्शनी में रखे बाजरे के बिस्कुट से प्रभावित देशभर के कृषि विज्ञानियों ने वेदपाल के हुनर की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। प्रगतिशील किसानों के हित में बने नेशनल इनोवेशन फंड के डायरेक्टर एके गुप्ता कहते हैं कि इस बिस्कुट की मार्केटिंग कराएंगे। हरियाणा किसान आयोग के सलाहकार डॉ. एमपी यादव कहते हैं कि लोगों में जागरूकता लाकर वेदपाल के बनाए बिस्कुट की मार्केटिंग में मदद करेंगे।












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