जीडीपी नहीं है देश की आर्थिक तरक्की का पैमाना

इस शोध दल के अगुवा प्रोफेसर फेलिसिया हपर्ट का कहना है कि सरकारों को इस बात का भी मूल्यांकन करना चाहिए कि उनके नागरिक अपने जीवन को किस तरह से जी रहे हैं। विश्वविद्यालय की ओर से जारी किए गए बयान के अनुसार यह अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह राष्टों की मजबूती और कमजोरी से जुड़े विभिन्न कारकों पर ध्यान देता है।
अध्ययन में इस तरह के 10 कारकों को चिन्हित किया गया है जिसमें क्षमता, भावनात्मक स्थिरता, आर्थिक स्थिति , आशावाद, सकारात्मक भावना, सकारात्मक संबंध, स्वाभिमान, मार्मिकता और लचीलापन शामिल हैं।












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