जंक फूड पर रोक के लिए छात्र पहुंचे कोर्ट

अदालत ने इस मुद्दे पर जंक फूड बनाने वाली कंपनियां और सरकार से जवाब तलब किया है। कार्यकारी न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलो की खंडपीठ ने जंक फूड बनाने वाली कंपनियों की एसोसिएशन को बच्चों द्वारा उठाए मुद्दे पर एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
वहीं, अदालत ने सरकार को भी स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने की प्रक्रिया में अब तक क्या प्रगति हुई है। पिछले दिनों जंक फूड बनाने वाली कंपनियों की एसोसिएशन ने मामले में उनका पक्ष सुने बिना कोई भी फैसला न करने का आग्रह किया था। स्कूल के करीब 20 छात्र मुख्य न्यायाधीश की अदालत में पहुंचे थे।
मामले की सुनवाई शुरू होते ही उन्होंने खंडपीठ को एक पत्र सौंपते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करने की इजाजत देने का आग्रह किया। बच्चों ने पत्र में कहा कि इसमें कोई राय नहीं कि हर व्यक्ति को व्यवसाय यानी रोजी-रोटी कमाने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी इस बात की इजाजत नहीं दी जा सकती कि वह रोजगार किसी अन्य के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर कमाए। हमें भी स्वास्थ्य का ध्यान रखने का अधिकार है और जंक फूड से आंखों पर प्रभाव पड़ने के अलावा शरीर पर विभिन्न बीमारियों का असर पड़ता है।
जंक फूड बनाने वाली कंपनियां काफी राजस्व एकत्रित कर रही हैं, लेकिन उनका ध्यान बच्चों के स्वास्थ्य पर नहीं है। देश में किसी को भी दूसरे के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर राजस्व कमाने का अधिकार नहीं दिया गया। वर्तमान लाइफ स्टाइल बच्चों को जीवन के अंत की ओर ले जा रही है। अत: सरकार को 90 दिन में सभी स्कूल, कालेजों की कैंटीन और उनके आसपास जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने का निर्देश दिया जाए। एसोसिएशन ने हाल ही में तर्क रखा था कि जंक फूड पर प्रतिबंध लगाने से उनका व्यवसाय प्रभावित होगा। किसी भी प्रकार का आदेश पारित करने से पूर्व उनका पक्ष सुना जाए।












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