अब पूर्वोत्‍तर राज्‍यों पर भी माओवादियों का शिकंजा

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नयी दिल्ली। पश्चिम बंगाल और झारखंड सहित कुछ राज्यों में अपनी सक्रियता वाले इलाकों पर पकड़ कमजोर पड़ने और किशनजी सहित कुछ बडे़ नेताओं के मारे या पकडे़ जाने के बाद भाकपा-माओवादी ने रणनीति में बदलाव करते हुए अब उन इलाकों में पैठ बनाने का इरादा किया है, जहां अब तक उनकी या तो उपस्थिति नहीं थी या नाम मात्र की गतिविधियां थीं।

इसी रणनीति के तहत माओवादियों ने पूर्वोत्‍तर के उग्रवादी संगठनों के साथ नजदीकी संबंध स्थापित कर वहां अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि भाकपा-माओवादी ने पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठनों रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ) और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ संबंध बनाये हैं।

समझा जाता है कि दोनों संगठनों ने माओवादियों के साथ प्रशिक्षण, धन की व्यवस्था और हथियार गोला बारूद की आपूर्ति में परस्पर सहयोग का फैसला किया है। सूत्रों ने बताया कि माओवादियों की उपरी असम लीडिंग कमेटी (यूएएलसी) इस समय असम और अरूणाचल प्रदेश में सक्रिय है। यूएएलसी असम में कैडरों की भर्ती भी कर रही है।

असम-अरूणाचल सीमा माओवादियों की गतिविधियों का बड़ा केन्द्र बनती नजर आ रही है। उन्होंने बताया कि माओवादियों की नजर वाणिज्यिक नगरी मुंबई और महाराष्ट्र के ही एक अन्य प्रमुख शहर पुणे तथा गुजरात के अहमदाबाद जैसे शहरों पर है। चौंकाने वाली बात यह है कि वे महाराष्ट्र में उन जिलों में गतिविधियां फैलाने की योजना बना रहे हैं, जहां उनकी उपस्थिति उतनी मजबूत नहीं है। गढ़चिरौली, गोंदिया और चंद्रपुर के बाद अब वे यवतमल, वर्धा, नागपुर जैसे जिलों में आधार मजबूत करने की सोच रहे हैं।

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