माया ही नहीं सतीश मिश्र का परिवार भी है भ्रष्ट: भाजपा

Satish Mishra & family involved in Rs 10,000 crores scam: BJP
लखनऊ। मायावती पर भ्रष्टाचार के दर्जनों आरोप लगाने के बाद अब भाजपा ने माया के करीबी नेताओं पर हमले करने शुरू कर दिये है। पहले नसीमुददीन और सतीश चन्द्र मिश्र। भारतीय जनता पार्टी ने सलाहकार परिषद के अध्यक्ष और बहुजन समाज पार्टी सांसद सतीश मिश्र के परिवार पर दस हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं ने कहा कि यदि केन्द्र सरकार इस भारी भरकम घोटाले की जानकारी के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की तो पार्टी अदालत का सहारा लेगी। भाजपा नेताओं ने कहा कि बसपा के काले कारनामों को उजागर करने वाला एक काला पत्र पार्टी जारी करेगी जो सरकार के श्वेत पत्र का जवाब होगा।

भाजपा सचिव किरीट सोमैया तथा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि सुश्री मायावती के भाई और श्री मिश्र के बेटे कपिल मिश्र ने मिलकर दस हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया है। भाजपा का कहना है कि दोनों नेतापुत्रों ने सरकारी धन का जमकर दुरपयोग किया है। उन्होंने कहा कि यदि केन्द्र सरकार ने 15 दिन के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की तो उन्हें मजबूरी में अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। श्री सोमैया ने कहा कि तीन सौ कंपनियों के जरिए मुख्यमंत्री के भाई और कपिल ने मिलकर घाटाले को अंजाम दिया है।

घोटोले पर श्री मिश्र के परिवार की महिलाओं का भी उजागर करते हुए श्री सोमैया ने आरोप लगाया कि इस घोटाले में उनके परिवार की कल्पना, श्यामली, सुभाषिनी, रूपश्री और भाग्यश्री मिश्रा की भी भूमिका रही हैं। उन्होंने कहा कि घोटाले के पैसों को छिपाने के लिए आनंद कुमार और कपिल ने मिलकर दर्जनों कंपनियां बना डाली हैं। श्री सोमैया ने यह हकीकत उजागर कि इन लोगों ने जिन कम्पनियों की नींव डाली उनमें कारोबार सुश्री मायावती की सरकार बनने के बाद ही शुरू हो पाया।

श्री सोमैया ने इस समूह की कुछ कंपनियों की सूची और दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि इस तरह की बेनामी और रहस्यमय कंपनियों की संख्या तीन सौ से ऊपर है जिसके जरिए यह घोटाले किये गये। उन्होंने कहा कि इन घोटालों के उजागर होने के बाद श्री मिश्र ने गुपचुप तरीके से अपने परिजनों को इन कंपनियों से अलग कर दिया है। इस काम के लिए बकायदा इस्तीफा दिलाया गया अथवा शेयर वापस लिये गये। इन घोटालों की अधिकारिक तौर पर कंपनी मामलों के मंत्रालय, प्रवर्तन निदेशालय और सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस में लिखित शिकायत की गयी है।

श्री सोमैया ने कहा कि इन कम्पनियों में से एक लेजर फाइनेंशियल ऐण्ड प्रोजेक्ट्स कंसलटेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को कुछ अज्ञात लोगों ने 1992 में बनायी थी। लम्बे समय तक इन कम्पनियों ने पैसे का कोई लेनदेन नहीं किया। वर्ष 2007 में आनन्द कुमार समूह ने इसे खरीद लिया, जिसके बाद आनन्द कुमार ने ग्रुप आफ रजिस्ट्रार आफ कम्पनीज को कागजात दिये उनमें साफ तौर पर दर्शाया गया था कि इस कम्पनी ने कभी कोई बिजनेस किया ही नहीं है लेकिन कम्पनी के शेयर चार सौ रुपये की दर से अज्ञात कम्पनियों ने खरीद लिये।

उनका कहना था कि इन कम्पनियों के खातों में हजारों करोड़ की रकम मौजूद है। श्री सोमैया ने बताया कि आनन्द कुमार समूह और कपिल ने 2007 में डाया रीयलटर्स प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी की स्थापना की और इस कम्पनी के जरिये हजारों करोड़ रुपयों का बेनामी लेनदेन किया। श्री सोमैया ने अरुण कुमार द्विवेदी नाम के एक व्यक्ति का जिक्र किया और बताया कि उक्त व्यक्ति सतीश मिश्रा का करीबी है और इस घोटाले का सहयोगी है।

उनका कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से शशांक शेखर ही आरोपों पर सफाई देने के लिए पेश होते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार श्री शेखर पहले कागजातों का गंभीरता से निरीक्षण कर लें उसके बाद ही किसी प्रकार की सफाई दें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के कल जारी श्वेतपत्र के जवाब में भाजपा जल्दी ही राज्य सरकार के काले कारनामों को लेकर काला पत्र जारी करेगी।

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